Saturday, August 30, 2025
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बिलासपुर में आज से गणेशोत्सव की धूम, ढोल-ताशों के साथ किया गया बप्पा का स्वागत, आकर्षक पंडालों और थीम आधारित सजावट के बीच शहर में विराजेंगे विघ्नहर्ता गणेश…

बिलासपुर। बिलासपुर शहर में आज से गणेशोत्सव की रंगीन शुरुआत होने जा रही है। मंगलवार को ही ढोल-ताशों और बैंड-बाजों की गूंज के बीच भक्तों ने विघ्नहर्ता गणपति बप्पा का स्वागत किया। जगह-जगह से शोभायात्रा निकाली गई और श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ गणेश प्रतिमाओं को पंडालों तक लेकर पहुंचे। शहर का माहौल पूरी तरह भक्तिमय और उल्लासपूर्ण दिखाई दिया। बाजारों में गणेश प्रतिमाओं, सजावट की वस्तुओं और पूजन सामग्री की खरीददारी को लेकर सुबह से देर रात तक जबरदस्त भीड़ उमड़ती रही।

चतुर्थी पर्व पर शुभ मुहूर्त में गणपति प्रतिमा की स्थापना कर विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। पंडालों में भव्य सजावट की गई है, जहां आकर्षक लाइटिंग, रंग-बिरंगी झालरों और थीम आधारित मंडपों की तैयारी से माहौल और भी सुंदर बन गया है। घरों में भी छोटी-छोटी बाल प्रतिमाओं की स्थापना के लिए श्रद्धालु उत्साहित नजर आए।

इसी बीच हरितालिका तीज का पर्व भी पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए निर्जला व्रत रखा। 24 घंटे तक जल तक ग्रहण न करने वाली महिलाएं रातभर शिव-पार्वती की पूजा और भजन-कीर्तन में लीन रहीं। शहर के मंदिरों और घरों में महिलाएं सोलह श्रृंगार में सज-धज कर पूजा-अर्चना करती नजर आईं। पारंपरिक फुलेरा सजाकर पार्थिव शिवलिंग बनाकर विधि-विधान से आराधना की गई और बुधवार सुबह व्रत का पारणा कर प्रसाद ग्रहण किया गया।

 

गणेशोत्सव की परंपरा बिलासपुर में कोई नई नहीं है। महाराष्ट्रीयन समाज ने आजादी के पहले ही इसे शुरू किया था। कहा जाता है कि अंग्रेजों के समय स्वतंत्रता सेनानी गणेश प्रतिमा की स्थापना के बहाने जुटते थे और गुप्त रूप से आंदोलन की रणनीति तैयार करते थे। इसी परंपरा की शुरुआत तिलकनगर चांटापारा से हुई और धीरे-धीरे पूरे शहर में गणेशोत्सव धूमधाम से मनाया जाने लगा।

इस वर्ष जूना बिलासपुर गणेशोत्सव समिति अपने 50 वर्ष पूरे कर रही है। इसे यादगार बनाने के लिए समिति ने खास तैयारियां की हैं। वहीं अष्टभुजी गणेश उत्सव समिति का यह 32वां वर्ष है और उन्होंने आतिशबाजी व लाइट शो के साथ भगवान गणेश का स्वागत किया। सिंधी समाज द्वारा इस बार पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम उठाते हुए झूलेलाल नगर में इको-फ्रेंडली गणेश मूर्ति बनाने का प्रशिक्षण दिया गया।

शहर के चौक-चौराहों, मुख्य सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर विशाल पंडाल सजाए गए हैं, जहां भक्त अपने आराध्य को देखने उमड़ेंगे। मूर्तिकारों ने 1 फीट से लेकर 15 फीट तक की प्रतिमाएं तैयार की हैं। बाजार में 100 रुपए से लेकर 5000 रुपए तक की मूर्तियां उपलब्ध हैं, वहीं समितियों ने स्पेशल ऑर्डर देकर बड़ी प्रतिमाएं पहले से बुक कर ली हैं। इस बार फैशनेबल और इको-फ्रेंडली मूर्तियों की मांग खास तौर पर बढ़ी है।

शहर की गलियां इन दिनों गणपति के जयकारों से गूंज रही हैं। ढोल-ताशों की थाप और सजावटी रोशनी से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है। गणेशोत्सव और तीज पर्व ने मिलकर बिलासपुर के धार्मिक और सांस्कृतिक रंग को और गहरा कर दिया है। अब श्रद्धालु उत्सुकता से चतुर्थी के दिन गणेश प्रतिमा की स्थापना और आराधना का इंतजार कर रहे हैं, जब गणपति बप्पा मोदक और लड्डुओं के बीच विराजमान होंगे और भक्तों की झोली आशीर्वाद से भरेंगे।

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बिलासपुर। बिलासपुर शहर में आज से गणेशोत्सव की रंगीन शुरुआत होने जा रही है। मंगलवार को ही ढोल-ताशों और बैंड-बाजों की गूंज के बीच भक्तों ने विघ्नहर्ता गणपति बप्पा का स्वागत किया। जगह-जगह से शोभायात्रा निकाली गई और श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ गणेश प्रतिमाओं को पंडालों तक लेकर पहुंचे। शहर का माहौल पूरी तरह भक्तिमय और उल्लासपूर्ण दिखाई दिया। बाजारों में गणेश प्रतिमाओं, सजावट की वस्तुओं और पूजन सामग्री की खरीददारी को लेकर सुबह से देर रात तक जबरदस्त भीड़ उमड़ती रही। चतुर्थी पर्व पर शुभ मुहूर्त में गणपति प्रतिमा की स्थापना कर विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। पंडालों में भव्य सजावट की गई है, जहां आकर्षक लाइटिंग, रंग-बिरंगी झालरों और थीम आधारित मंडपों की तैयारी से माहौल और भी सुंदर बन गया है। घरों में भी छोटी-छोटी बाल प्रतिमाओं की स्थापना के लिए श्रद्धालु उत्साहित नजर आए। इसी बीच हरितालिका तीज का पर्व भी पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए निर्जला व्रत रखा। 24 घंटे तक जल तक ग्रहण न करने वाली महिलाएं रातभर शिव-पार्वती की पूजा और भजन-कीर्तन में लीन रहीं। शहर के मंदिरों और घरों में महिलाएं सोलह श्रृंगार में सज-धज कर पूजा-अर्चना करती नजर आईं। पारंपरिक फुलेरा सजाकर पार्थिव शिवलिंग बनाकर विधि-विधान से आराधना की गई और बुधवार सुबह व्रत का पारणा कर प्रसाद ग्रहण किया गया।   गणेशोत्सव की परंपरा बिलासपुर में कोई नई नहीं है। महाराष्ट्रीयन समाज ने आजादी के पहले ही इसे शुरू किया था। कहा जाता है कि अंग्रेजों के समय स्वतंत्रता सेनानी गणेश प्रतिमा की स्थापना के बहाने जुटते थे और गुप्त रूप से आंदोलन की रणनीति तैयार करते थे। इसी परंपरा की शुरुआत तिलकनगर चांटापारा से हुई और धीरे-धीरे पूरे शहर में गणेशोत्सव धूमधाम से मनाया जाने लगा। इस वर्ष जूना बिलासपुर गणेशोत्सव समिति अपने 50 वर्ष पूरे कर रही है। इसे यादगार बनाने के लिए समिति ने खास तैयारियां की हैं। वहीं अष्टभुजी गणेश उत्सव समिति का यह 32वां वर्ष है और उन्होंने आतिशबाजी व लाइट शो के साथ भगवान गणेश का स्वागत किया। सिंधी समाज द्वारा इस बार पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम उठाते हुए झूलेलाल नगर में इको-फ्रेंडली गणेश मूर्ति बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। शहर के चौक-चौराहों, मुख्य सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर विशाल पंडाल सजाए गए हैं, जहां भक्त अपने आराध्य को देखने उमड़ेंगे। मूर्तिकारों ने 1 फीट से लेकर 15 फीट तक की प्रतिमाएं तैयार की हैं। बाजार में 100 रुपए से लेकर 5000 रुपए तक की मूर्तियां उपलब्ध हैं, वहीं समितियों ने स्पेशल ऑर्डर देकर बड़ी प्रतिमाएं पहले से बुक कर ली हैं। इस बार फैशनेबल और इको-फ्रेंडली मूर्तियों की मांग खास तौर पर बढ़ी है। शहर की गलियां इन दिनों गणपति के जयकारों से गूंज रही हैं। ढोल-ताशों की थाप और सजावटी रोशनी से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है। गणेशोत्सव और तीज पर्व ने मिलकर बिलासपुर के धार्मिक और सांस्कृतिक रंग को और गहरा कर दिया है। अब श्रद्धालु उत्सुकता से चतुर्थी के दिन गणेश प्रतिमा की स्थापना और आराधना का इंतजार कर रहे हैं, जब गणपति बप्पा मोदक और लड्डुओं के बीच विराजमान होंगे और भक्तों की झोली आशीर्वाद से भरेंगे।