
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर के व्यापार विहार स्थित ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल (BPS) एक बार फिर विवादों में घिर गया है। स्कूल प्रबंधन पर आरोप है कि उसने अभिभावकों को CBSE बोर्ड से संबद्ध होने का दावा कर बच्चों का एडमिशन कराया, जबकि हकीकत में स्कूल के पास CBSE की मान्यता ही नहीं है। इस मामले को लेकर अब सैकड़ों बच्चों के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं।

मामला तब तूल पकड़ गया जब पांचवीं और आठवीं कक्षा के छात्रों पर दोबारा परीक्षा देने का दबाव बनाया जाने लगा। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों ने पहले ही परीक्षा दे दी है, लेकिन अब स्कूल प्रबंधन उन्हें CG बोर्ड की परीक्षा दिलाने के लिए मजबूर कर रहा है।

परिजनों का आरोप है कि एडमिशन के समय स्कूल ने साफ तौर पर कहा था कि यहां CBSE पैटर्न पर पढ़ाई होती है और CBSE परीक्षा होगी, लेकिन अब प्रबंधन कह रहा है कि बच्चों का रिजल्ट CG बोर्ड के तहत आएगा। इस अचानक बदलाव से सैकड़ों छात्र और उनके पालक असमंजस में पड़ गए हैं। इसी शिकायत को लेकर कई अभिभावक कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता जताई। परिजनों का कहना है कि वे पिछले 4-5 दिनों से इस मामले को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन स्कूल प्रबंधन की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा।

वहीं बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि अभिभावक उनसे मिलने आए थे। उन्होंने बताया कि स्कूल की CBSE संबद्धता अपडेट नहीं है, जबकि पढ़ाई CBSE पैटर्न पर कराई जा रही है। कलेक्टर ने कहा कि शिक्षा विभाग से इस संबंध में चर्चा की गई है और कोशिश की जाएगी कि बच्चों को जून में परीक्षा देने का अवसर मिले, ताकि उनके भविष्य पर कोई नकारात्मक असर न पड़े। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी स्थिति में बच्चों का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।
फिलहाल इस पूरे मामले ने निजी स्कूलों की पारदर्शिता और शिक्षा विभाग की निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला सैकड़ों बच्चों के भविष्य से जुड़ा बड़ा शैक्षणिक विवाद बन सकता है।
