रायपुर। रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 21 अगस्त को अपनी विदेश यात्रा पर रवाना होंगे, लेकिन उसके पहले छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम होने वाला है। लंबे समय से लंबित मंत्रिमंडल विस्तार अब अंतिम रूप ले चुका है। कल सुबह तीन नए मंत्री शपथ लेंगे और शाम या रात तक उनके विभागों का बंटवारा भी हो जाएगा। इस बार विशेष बात यह है कि विभागों का युक्तियुक्तकरण पहले से तय कर लिया गया है, ताकि पिछली बार की तरह देरी न हो। याद दिला दें, 21 दिसंबर 2023 को जब 11 मंत्रियों ने शपथ ली थी तो विभाग मिलने में दस दिन से ज्यादा का वक्त लग गया था। मगर इस बार मुख्यमंत्री ने विदेश दौरे से पहले ही सब कुछ निपटा लेने का मन बना लिया है।
गजेंद्र यादव को मिल सकता है शिक्षा विभाग
सबसे चर्चित विभाग शिक्षा का है, जिसे अब तक मुख्यमंत्री ने अपने पास रखा था। बृजमोहन अग्रवाल के सांसद चुने जाने के बाद जून 2024 में यह विभाग खाली हो गया था और तब से सीएम के पास ही रहा। अब संभावना है कि यह जिम्मेदारी दुर्ग विधायक गजेंद्र यादव को सौंपी जाएगी। सूत्रों के अनुसार, गजेंद्र यादव शिक्षित पृष्ठभूमि से आते हैं और रविशंकर विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट हैं। माना जा रहा है कि शिक्षा से जुड़े तीनों विभाग—स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा—उनके पास होंगे। इसके लिए डिप्टी सीएम विजय शर्मा से तकनीकी शिक्षा विभाग लेकर उन्हें सौंपा जाएगा। इससे विजय शर्मा के पास गृह, जेल और पंचायत जैसे भारी-भरकम विभाग रह जाएंगे।
खुशवंत साहेब को पीएचई और अन्य विभाग
इसी तरह खुशवंत साहेब को पीएचई विभाग मिलने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। वर्तमान में यह विभाग डिप्टी सीएम अरुण साव के पास है। खुशवंत साहेब को इसके साथ खादी ग्रामोद्योग और अन्य छोटे विभाग भी दिए जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व यह संदेश देना चाहता है कि नए चेहरों को भी जिम्मेदार विभाग देकर सरकार की कार्यशैली में संतुलन कायम किया जाए।
राजेश अग्रवाल को वन और आबकारी
तीसरे नए मंत्री राजेश अग्रवाल को लेकर कयास यह है कि उन्हें आबकारी विभाग मिल सकता है। मुख्यमंत्री फिलहाल आबकारी और ट्रांसपोर्ट अपने पास रखे हुए हैं, लेकिन दोनों विभाग परंपरागत तौर पर मुख्यमंत्री के पास नहीं रहते। आबकारी विभाग को लेकर सबसे अधिक चर्चाएं राजेश अग्रवाल के नाम पर ही केंद्रित हैं। वहीं वन विभाग को लेकर भी हलचल है। बताया जा रहा है कि वर्तमान मंत्री केदार कश्यप वन विभाग से संतुष्ट नहीं हैं। यदि वे इसे छोड़ते हैं, तो राजेश अग्रवाल को वन भी सौंपा जा सकता है। हालांकि, ऐसी स्थिति में विभागों के बड़े फेरबदल की भी संभावना है, क्योंकि कश्यप को किसी अन्य बड़े विभाग से समायोजित करना पड़ेगा।
मौजूदा मंत्रियों के बीच भी युक्तियुक्तकरण की जरूरत है। दोनों डिप्टी सीएम—विजय शर्मा और अरुण साव—के पास कई विभाग हैं। वहीं, ओपी चौधरी के पास वित्त, जीएसटी, पंजीयन, प्लानिंग और आवास-पर्यावरण विभाग हैं। पंजीयन को छोड़कर बाकी विभाग उनसे जुड़े रहते हैं और सुधार कार्यों को देखते हुए इन्हें उनके पास ही रहने देने की संभावना है।
यह विस्तार इसलिए भी खास है क्योंकि विष्णुदेव साय के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला कैबिनेट विस्तार होगा। दिसंबर 2023 और मई 2025 में विस्तार टल गया था, लेकिन इस बार दिल्ली से हरी झंडी मिलने के बाद फैसला फाइनल हो गया है। दिलचस्प बात यह है कि हरियाणा की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी 13 मंत्रियों की मांग उठी थी। हरियाणा की तरह यहां भी 90 विधायक हैं, इसलिए अब 13 सदस्यीय मंत्रिमंडल बनने की संभावना है।
मंत्री पद की दावेदारी शुरू से कई नेताओं की रही थी—अमर अग्रवाल, अजय चंद्राकर, राजेश मूणत, गजेंद्र यादव और संपत अग्रवाल प्रमुख नाम थे। लेकिन आखिरी समय में खुशवंत साहेब और राजेश अग्रवाल के नाम पर सहमति बनी। 16 अगस्त को मुख्यमंत्री के राजभवन दौरे के बाद इन दोनों के नाम सोशल मीडिया में चर्चित हो गए थे। इसके बाद गजेंद्र यादव, खुशवंत साहेब और राजेश अग्रवाल ने सीएम हाउस पहुंचकर मुख्यमंत्री से मुलाकात की और उन्हें शपथ की औपचारिक सूचना दी गई।
अब 21 अगस्त की सुबह शपथ और उसी दिन देर शाम विभागों का बंटवारा राजनीतिक हलचल का केंद्र बनेगा। इससे न सिर्फ मंत्रियों की जिम्मेदारियां तय होंगी बल्कि आने वाले समय में सरकार की कार्यशैली और प्राथमिकताओं का भी संकेत मिलेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की विदेश यात्रा से पहले यह बड़ा राजनीतिक कदम छत्तीसगढ़ की सत्ता के समीकरणों को नया आकार देने वाला साबित होगा।