
डेस्क। देशभर में इस समय CBSE सहित कई राज्य बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं। छत्तीसगढ़ में भी आज यानी 20 फरवरी से 12वीं बोर्ड परीक्षा की शुरुआत हो चुकी है, जबकि 21 फरवरी से कक्षा 10वीं की परीक्षा शुरू होने जा रही है।
लेकिन परीक्षा के इस माहौल के बीच एक बेहद चिंताजनक और दुखद तस्वीर सामने आई है।

पिछले तीन दिनों में छत्तीसगढ़ के दो जिलों – कोरबा और जांजगीर-चांपा – से 5 छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं सामने आई हैं। इनमें 3 छात्राएं और 2 छात्र शामिल हैं। ये सभी बोर्ड परीक्षा से जुड़े हुए थे और उम्र महज़ 16 से 18 साल के बीच थी।
कहां-कहां और कैसे हुई घटनाएं
कोरबा जिले से 4 मामले
पहली घटना – इंद्रानगर, कोतवाली थाना क्षेत्र
10वीं कक्षा की छात्रा अंजलि केंवट (17 वर्ष) ने 17 फरवरी को अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि वह बोर्ड परीक्षा को लेकर तनाव में थी।
दूसरी घटना – उरगा थाना क्षेत्र, धमनागुड़ी मोहार गांव
16 वर्षीय गीता महंत ने एक पेड़ से फांसी लगाकर जान दे दी। गीता की मां का पहले ही निधन हो चुका था। पारिवारिक सदमे और पढ़ाई पर असर के चलते वह मानसिक रूप से परेशान चल रही थी।
तीसरी घटना – सिविल लाइन थाना क्षेत्र, रामपुर आईटीआई बस्ती डीएवी पब्लिक स्कूल के 12वीं कक्षा के छात्र उज्जवल डनसेना (17 वर्ष) ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसने सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें मेडिकल कॉलेज में देहदान की इच्छा लिखी थी। यह घटना पूरे इलाके को झकझोर देने वाली रही।
चौथी घटना – सीएसईबी कॉलोनी, सिविल लाइन थाना क्षेत्र
12वीं के छात्र दीपांशु कौशिक ने उस वक्त आत्महत्या कर ली जब वह घर पर अकेला था। परिजनों के अनुसार, वह परीक्षा और भविष्य को लेकर चिंतित रहता था।
जांजगीर-चांपा जिले से 1 मामला
पांचवीं घटना – लछनपुर गांव, सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र
12वीं कक्षा की छात्रा रजनी सूर्यवंशी (18 वर्ष) ने अपने कमरे में पंखे से फांसी लगाकर जान दे दी। आत्महत्या से पहले उसने अपने बॉयफ्रेंड को वीडियो कॉल किया था। प्राथमिक जांच में प्रेम प्रसंग को वजह बताया जा रहा है।
क्यों उठा रहे हैं छात्र इतना बड़ा कदम?
पुलिस की प्रारंभिक जांच और परिजनों के बयान के अनुसार,
- बोर्ड परीक्षा का अत्यधिक दबाव
- असफल होने का डर
- पारिवारिक या भावनात्मक तनाव
- सामाजिक अपेक्षाएं और तुलना
जैसे कारण छात्रों को मानसिक रूप से तोड़ रहे हैं। कई छात्र अपने डर और तनाव को किसी से साझा नहीं कर पा रहे हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।
बोर्ड परीक्षा और मानसिक स्वास्थ्य: एक गंभीर चेतावनी
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा केवल जीवन का एक हिस्सा है, लेकिन समाज और परिवारों की अपेक्षाएं इसे “सब कुछ” बना देती हैं। यही सोच कई बार बच्चों को यह महसूस करा देती है कि असफलता का मतलब जीवन खत्म होना है, जो कि बेहद खतरनाक सोच है।
तनाव से कैसे करें बचाव
अगर आप या आपके आसपास कोई छात्र मानसिक तनाव, घबराहट या निराशा से गुजर रहा है, तो इन बातों पर जरूर ध्यान दें:
- अपने मन की बात किसी भरोसेमंद व्यक्ति से साझा करें
- अकेले कमरे में घंटों बंद न रहें
- भरपूर नींद लें और मोबाइल से थोड़ा ब्रेक लें
- मेडिटेशन, प्राणायाम या हल्की एक्सरसाइज करें
- याद रखें: परीक्षा दोबारा दी जा सकती है, लेकिन जीवन नहीं
मदद के लिए तुरंत संपर्क करें
अगर किसी को खुद को नुकसान पहुंचाने का ख्याल आ रहा है, तो तुरंत मदद लें:
भारत सरकार सुसाइड हेल्पलाइन:
14416
1800-891-4416
एक जरूरी अपील
यह समय बच्चों को डराने का नहीं, बल्कि समझने, सुनने और सहारा देने का है। नंबर, रिजल्ट और रैंक से कहीं ज्यादा कीमती एक ज़िंदगी होती है।
