
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने साय सरकार का तीसरा बजट पेश किया। 1 लाख 72 हजार करोड़ रुपए के इस बजट की थीम ‘संकल्प’ रखी गई। करीब दो घंटे से ज्यादा चले बजट भाषण में सरकार ने किसानों, बेटियों, उद्योग और कर्मचारियों के लिए कई बड़े ऐलान किए, लेकिन बजट पेश होते ही सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाज़ी शुरू हो गई।

बजट में किसानों को ब्याज मुक्त कर्ज, बेटियों को 18 वर्ष पूरे होने पर डेढ़ लाख रुपए देने और राज्य में 23 नए उद्योग खोलने की घोषणा की गई है। वहीं राज्य कर्मचारियों के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है।

विपक्ष का हमला: ‘ChatGPT Budget’ और शब्दों का मायाजाल
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बजट को लेकर तंज कसते हुए इसे ‘ChatGPT Budget’ करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि पहले पतंग उड़ाने, फिर कन्ना और मांझा बांधने की घोषणाएं होती रहेंगी, लेकिन अंत में जनता जुमलों की यह पतंग काट देगी।
बघेल ने सरकार पर आरोप लगाया कि बजट भाषण आकर्षक शब्दों और शायरी तक सीमित है, जबकि जमीनी सच्चाई इससे अलग है।

नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने भी बजट को “शब्दों का मायाजाल” बताया। उनका कहना है कि इसमें न किसानों के लिए कुछ ठोस है और न ही युवाओं, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों पर कोई स्पष्ट रोडमैप।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि “ज्ञान का अल्पज्ञान हो गया, गति की दुर्गति हो गई” और संकल्प के नाम पर पेश बजट पर उन्हें भरोसा नहीं है। उनके मुताबिक रोजगार, धान और किसान जैसे अहम मुद्दों को नजरअंदाज किया गया है।

सत्ता पक्ष का जवाब: विकसित छत्तीसगढ़ की नींव
डिप्टी सीएम अरुण साव ने बजट को छत्तीसगढ़ के विकास का ब्लूप्रिंट बताया। उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग को लगभग 10 हजार करोड़ रुपए मिले हैं और नगरीय प्रशासन के लिए भी पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं। मुख्यमंत्री आदर्श शहर समृद्धि योजना और मुख्यमंत्री दूर ग्रामीण सड़क योजना जैसी नई पहलों से राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी।

कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि बजट में गांव, गरीब, किसान, मजदूर, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा सभी केंद्र में हैं। उन्होंने दावा किया कि यह बजट राज्य के सर्वांगीण विकास और रोजगार सृजन की दिशा में अहम कदम है।
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वहीं पूर्व वित्त मंत्री और भाजपा विधायक अमर अग्रवाल ने इसे सर्वसमावेशी विकास की सोच को जमीन पर उतारने वाला बजट बताया।
कुल मिलाकर
‘संकल्प’ बजट को लेकर सरकार इसे विकास और भविष्य निर्माण का दस्तावेज बता रही है, जबकि विपक्ष इसे शब्दों और वादों का पुलिंदा कहकर खारिज कर रहा है। अब असली परीक्षा इस बजट के ज़मीनी क्रियान्वयन में होगी—यहीं तय होगा कि यह संकल्प हकीकत बनेगा या सिर्फ सियासी बहस तक सीमित रहेगा।
