
दुर्ग। सरकारी नौकरी का झांसा देकर लोगों से करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ दुर्ग पुलिस ने किया है। अंजोरा स्थित वेटनरी कॉलेज के स्टाफ क्वार्टर में बैठकर शातिर ठगों ने नौकरी दिलाने का लालच देकर दर्जनभर लोगों से लाखों रुपए ऐंठ लिए। पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपी पिता-पुत्र को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक आरोपी अब भी फरार है।

ऐसे हुआ खुलासा
बालोद जिले के ग्राम चीरचार निवासी संतराम देशमुख (54) ने अंजोरा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि भेषराम देशमुख (62), उसका बेटा रविकांत देशमुख (32) और साथी अरुण मेश्राम (राजनांदगांव निवासी) ने मंत्रालय में नौकरी दिलाने का वादा किया। इस बहाने उनसे 5 लाख रुपए वसूले गए, लेकिन न तो नौकरी मिली और न ही नियुक्ति पत्र।

अन्य पीड़ित भी आए सामने
जांच के दौरान लोमश देशमुख और हेमंत कुमार साहू समेत अन्य पीड़ित भी सामने आए। सभी ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने उनसे भी नौकरी लगाने का झांसा देकर नकद और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए रकम वसूली। पुलिस ने सभी डिजिटल ट्रांजेक्शन और दस्तावेज सबूत के तौर पर जब्त कर लिए हैं।

70 लाख की ठगी का राजफाश
6 सितंबर को पुलिस ने भेषराम और रविकांत को दुर्ग बस स्टैंड से गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अरुण मेश्राम के साथ मिलकर अब तक करीब 70 लाख रुपए की ठगी की है। पिता-पुत्र ने अपने हिस्से के करीब 20 लाख रुपए में से 12 लाख रुपये ग्राम कुथरेल में प्लॉट खरीदने में लगाए थे, जबकि शेष रकम खर्च कर दी गई।

संपत्ति और दस्तावेज जब्त
पुलिस ने आरोपियों से खरीदे गए प्लॉट की रजिस्ट्री, बैंक पासबुक और डायरी जब्त कर ली है। फरार आरोपी अरुण मेश्राम की तलाश की जा रही है।
