
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला जनपद पंचायत कार्यालय से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। सभागार (कॉन्फ्रेंस हॉल) के रिनोवेशन और मरम्मत कार्य के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा को हटा दिया गया, लेकिन उसे सुरक्षित स्थान पर रखने की बजाय परिसर के बाहर कचरे और मलबे के ढेर के पास फेंक दिया गया।जिस महापुरुष ने देश को स्वतंत्रता, सत्य, अहिंसा और स्वच्छता का संदेश दिया, उनकी मूर्ति का इस तरह गंदगी में पड़ा होना स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्धजनों में गुस्सा और नाराजगी की लहर पैदा कर रहा है। लोगों का कहना है कि यह केवल एक मूर्ति का नहीं, बल्कि राष्ट्र के गौरव, स्वाधीनता संग्राम के इतिहास और बापू के आदर्शों का सीधा अपमान है।

जनपद पंचायत के सभाहाल में चल रहे मरम्मत कार्य के दौरान प्रशासन की लापरवाही सामने आई। मूर्ति को हटाया तो गया, लेकिन कोई जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी उसे उचित स्थान पर स्थापित करने या कम से कम सुरक्षित रखने की जहमत नहीं उठा। परिणामस्वरूप बापू की प्रतिमा धूल-मिट्टी और कचरे के बीच लावारिस पड़ी रही।यह घटना स्वच्छ भारत अभियान की विडंबना को भी उजागर करती है — जिसकी कल्पना स्वयं महात्मा गांधी ने की थी, आज उसी की मूर्ति कचरे के पास फेंकी हुई मिली।

स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस कृत्य की कड़ी निंदा की है। कई लोगों का कहना है कि मरम्मत के नाम पर राष्ट्रपिता की गरिमा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रशासन से दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने और मूर्ति को तुरंत सम्मानजनक स्थान पर स्थापित करने की मांग की है।
घटना की खबर फैलते ही स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और जनपद पंचायत इस लापरवाही पर कितनी गंभीरता से संज्ञान लेते हैं और दोषियों पर क्या कदम उठाते हैं।ऐसी घटनाएं न केवल भावनाओं को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि सरकारी मशीनरी में जवाबदेही और संवेदनशीलता की कमी को भी उजागर करती हैं। राष्ट्रपिता के प्रति सम्मान बनाए रखना हर नागरिक और प्रशासन की जिम्मेदारी है।
