
बलरामपुर। छत्तीसगढ़ में अवैध अफीम की खेती के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। दुर्ग जिले में बड़े खुलासे के बाद अब बलरामपुर जिले से भी अफीम की खेती का मामला सामने आया है। कुसमी थाना क्षेत्र के त्रिपुरी गांव के सरनाटोली इलाके में जंगल किनारे करीब 2 एकड़ जमीन पर अफीम की अवैध खेती पकड़ी गई है।

ग्रामीणों से सूचना मिलने के बाद पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि एक आदिवासी की जमीन को लीज पर लेकर झारखंड का एक व्यक्ति अफीम की खेती कर रहा था। खेत में अफीम की फसल पूरी तरह तैयार थी और डोडों में चीरा भी लगाया जा चुका था।

पुलिस और प्रशासन की टीम अब इस अवैध खेती से जुड़े लोगों की पहचान करने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इधर दुर्ग जिले में भी अफीम की खेती के मामले में प्रशासन लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है। समोदा गांव में अफीम की खेती के मुख्य आरोपी भाजपा नेता विनायक ताम्रकार के भाई बृजेश ताम्रकार की अवैध दुकान पर मंगलवार को बुलडोजर चलाया गया। बताया जा रहा है कि सड़क किनारे करीब 32 डिसमिल सरकारी जमीन पर 20 साल से कब्जा कर दुकान बना ली गई थी।

पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए और लोग मोबाइल से वीडियो बनाते रहे।

दुर्ग जिले के समोदा और झेनझरी गांव में विनायक ताम्रकार के खेत से करीब 5 एकड़ 62 डिसमिल जमीन पर लगी अफीम की फसल उखाड़ दी गई है। पुलिस ने करीब 62 हजार किलो अफीम के पौधे जब्त किए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 7 करोड़ 88 लाख रुपए बताई जा रही है।
जब्त की गई फसल को चार ट्रैक्टर में भरकर सुरक्षित स्थान पर रखा गया है और इसे नष्ट करने के लिए पर्यावरण विभाग से अनुमति मांगी गई है। अनुमति मिलते ही पूरी फसल को नष्ट किया जाएगा।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि अफीम के खेत की सुरक्षा के लिए शिवनाथ नदी की ओर लगी फेंसिंग में करंट वाले तार लगाए गए थे, ताकि कोई बाहरी व्यक्ति खेत में प्रवेश न कर सके। खेत के बाहर सुरक्षा के लिए बाउंसर भी तैनात किए गए थे।
फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और आशंका जताई जा रही है कि इस अवैध खेती के पीछे बड़ा गिरोह सक्रिय हो सकता है।
