
बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में अवैध अफीम की खेती के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कुसमी क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई के बाद अब कोरंधा थाना क्षेत्र के खजूरी गांव में भी अफीम की खेती का खुलासा हुआ है। यहां तीन किसानों की करीब ढाई एकड़ जमीन पर अवैध रूप से अफीम की फसल लगाई गई थी। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पूरी फसल को उखाड़कर जब्त कर लिया है।

ग्रामीणों की सूचना से खुला मामला
जानकारी के अनुसार, खजूरी गांव में कुछ लोगों द्वारा गुपचुप तरीके से अफीम की खेती की जा रही थी। बुधवार देर शाम ग्रामीणों को इसकी जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और खेतों का निरीक्षण किया। खेतों में अफीम की खड़ी फसल देखकर पुलिस ने तुरंत प्रशासन को इसकी जानकारी दी।

झारखंड सीमा से लगा पहाड़ी इलाका
तुर्रापानी क्षेत्र खजूरी पंचायत का हिस्सा है, लेकिन यह पहाड़ी इलाका होने के कारण यहां आम लोगों का आना-जाना कम रहता है। यही वजह है कि आरोपियों ने इस जगह को अफीम की खेती के लिए चुना। यह इलाका झारखंड की सीमा से लगा हुआ है, जिससे बाहरी लोगों का आना-जाना भी आसान हो जाता है। पुलिस ने एहतियात के तौर पर रात में ही मौके पर जवानों की तैनाती कर दी थी, ताकि कोई सबूत नष्ट न हो सके।

प्रशासनिक टीम ने की कार्रवाई
गुरुवार को सरगुजा संभाग के कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, बलरामपुर कलेक्टर राजेंद्र कटारा और एसपी वैभव बैंकर मौके पर पहुंचे। मजिस्ट्रेट आशीष कुमार की मौजूदगी में खेतों में लगी अफीम की फसल को उखाड़कर जब्त किया गया। प्रशासन ने पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई।

तीन किसानों को लिया गया हिरासत में
मामले में तीन किसानों को हिरासत में लिया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि झारखंड के चतरा जिले का रहने वाला राजेंद्र राम खजूरी गांव के सहादुर राम, रोपना राम सहित अन्य किसानों की जमीन किराए पर लेकर वहां अफीम की खेती करवा रहा था। पुलिस अब राजेंद्र राम और अन्य लोगों की तलाश कर रही है।

भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर उठाया मुद्दा
खजूरी गांव में अफीम की खेती मिलने के मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि बलरामपुर जिले के करौंधा क्षेत्र के पास खजूरी पंचायत में डेढ़ एकड़ जमीन पर अफीम की खेती मिली है और इसे क्षेत्र में सामने आया तीसरा मामला बताया।

अफीम के डोडों में मिले कई चीरे
जांच के दौरान पुलिस ने देखा कि अफीम के डोडों में पांच से छह चीरे लगाए गए थे, जिससे यह साफ हो गया कि यहां अफीम निकालने का काम भी किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि अफीम का लेटेक्स निकालने का काम झारखंड से आए मजदूर करते थे। फिलहाल सभी मजदूर फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है।

पहले भी पकड़ी जा चुकी है बड़ी खेती
इससे पहले कुसमी क्षेत्र के त्रिपुरी घोसराडांड़ गांव में भी अवैध अफीम की खेती का बड़ा मामला सामने आया था। वहां करीब 3.67 एकड़ जमीन पर अफीम की खेती की जा रही थी। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और एफएसएल की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और खेतों से अफीम के सैंपल लिए।
कार्रवाई के दौरान करीब 4,344 किलोग्राम अफीम जब्त की गई, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 4 करोड़ 75 लाख रुपये बताई गई। इसके अलावा खेतों के बीच से करीब दो किलो अफीम लेटेक्स भी बरामद किया गया था।

सात आरोपी गिरफ्तार, सरगना अब भी फरार
त्रिपुरी मामले में पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें रूपदेव राम भगत (50), कौशिल भगत (30), मनोज कुमार (24, जिला गया बिहार), जिरमल मुण्डा (56, जिला जशपुर), उपेंद्र कुमार (27, जिला गया बिहार), विन्देश्वर (45, जिला चतरा झारखंड) और कृष्णा सिंह (जिला जशपुर) शामिल हैं। हालांकि इस मामले का मुख्य सरगना अभी भी फरार बताया जा रहा है और उसकी तलाश जारी है।
जांच में जुटी पुलिस
लगातार सामने आ रहे इन मामलों के बाद पुलिस और प्रशासन ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि सीमा से लगे इलाकों में विशेष अभियान चलाया जाएगा और अवैध अफीम की खेती करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और इसमें शामिल अन्य लोगों की तलाश जारी है।
