Thursday, February 12, 2026
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निगम में सियासी उठा-पटक: नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी पर घमासान, कांग्रेस में बढ़ी तकरार! बगावती पार्षदों को मनाने में जुटे दीपक बैज…

रायपुर। रायपुर नगर निगम में कांग्रेस के पांच पार्षदों के इस्तीफे के बाद पार्टी में अंदरूनी कलह तेज़ हो गई है। विपक्ष के नेता के चयन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज नाराज़ पार्षदों को मनाने में जुटे हैं और लगातार फोन कर उनसे बातचीत कर रहे हैं ताकि मामला सुलझाया जा सके।

जानकारी ये भी है कि पार्षद बागी होकर पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले आकाश तिवारी का अब खुलकर विरोध भी कर रहे हैं। पार्षदों ने नेताप्रतिपक्ष बदलने तक पार्टी में वापसी से इनकार कर दिया है। साथ ही जानकारी ये भी है कि कांग्रेस की ओर से बनाए गए नेता प्रतिपक्ष संदीप साहू से बैज ने अब तक कोई संपर्क नहीं किया है। इसके ये मायने निकाले जा सकते हैं कि पीसीसी चार पार्षदों का संदीप साहू से समर्थन वापस लेने की पूरी कोशिश में जुटा हुआ है।

कांग्रेस में मचा घमासान थामने छत्तीसगढ़ पहुंचेंगे सह-प्रभारी, पीसीसी बैठक के आसार

कांग्रेस के अंदरूनी विवाद को सुलझाने की कोशिशें तेज़ हो गई हैं। पार्टी के प्रदेश सह-प्रभारी विजय जांगिड कल तीन दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुंच रहे हैं। माना जा रहा है कि रायपुर नगर निगम में पांच पार्षदों के इस्तीफे और नेता प्रतिपक्ष को लेकर चल रही खींचतान पर पीसीसी में गंभीर चर्चा हो सकती है।

बीजेपी का हमला—कांग्रेस में मची अफरा-तफरी, डूबती नाव बताया

कांग्रेस की अंदरूनी कलह पर बीजेपी ने जोरदार हमला बोला है। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस को डूबता जहाज करार देते हुए कहा कि पहले संदीप साहू को नेता प्रतिपक्ष चुना गया और फिर उन्हें हटा दिया गया। इससे असंतुष्ट होकर पांच पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया, जो कांग्रेस की बिगड़ती स्थिति का प्रमाण है।

घर का मामला है, घर में सुलझेगा”: दीपक बैज ने पार्षदों के इस्तीफे पर दी प्रतिक्रिया

नगर निगम में कांग्रेस को लगे झटके पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पार्षदों के इस्तीफे को ‘घर का मामला’ बताते हुए कहा है कि यह विवाद पार्टी के भीतर ही सुलझा लिया जाएगा।

हालांकि बीते 20 दिनों से पीसीसी के फैसलों को लेकर लगातार असंतोष देखा जा रहा है, बावजूद इसके पार्टी नेतृत्व ने अपने निर्णय में कोई बदलाव नहीं किया। इस स्थिति का सीधा असर पार्टी की ताकत पर पड़ा है—कांग्रेस के पार्षदों की संख्या 8 से घटकर अब सिर्फ 3 रह गई है।

अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि बैज की पहल और प्रयासों से क्या प्रदेश के सबसे बड़े नगर निगम में कांग्रेस अपनी स्थिति संभाल पाएगी या संगठनात्मक संकट और गहराएगा।

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