Wednesday, February 11, 2026
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बिलासपुर के चर्चित टीआई कलीम खान पर गिरी गाज, एक साल के लिए डिमोशन,अब एसआई की कुर्सी संभालेंगे, जानिए पूरा मामला ….

बिलासपुर। बिलासपुर रेंज के चर्चित पुलिस अधिकारी टीआई कलीम खान पर चार साल पुरानी गंभीर शिकायत में कार्रवाई हुई है। उन पर एक धोखाधड़ी के आरोपी से न केवल केस को कमजोर करने के लिए पैसों की मांग करने, बल्कि आरोपी की पत्नी से यौन शोषण के आरोप भी लगे थे। मामले की जांच के बाद आईजी संजीव शुक्ला ने उन्हें टीआई पद से डिमोट कर एक साल के लिए एसआई बना दिया है।

यह मामला उस समय का है जब कलीम खान बिलासपुर जिले में विभिन्न थानों जैसे चकरभाठा, तारबाहर, सिविल लाइन, कोतवाली और साइबर सेल में तैनात थे। अपने कार्यकाल में उन्होंने कई हाई-प्रोफाइल केस सुलझाए, जिनमें विराट अपहरणकांड विशेष रूप से उल्लेखनीय है। हालांकि, कलीम खान हमेशा विवादों से घिरे रहे, और उनका तत्कालीन विधायक शैलेश पांडे से टकराव भी सुर्खियों में रहा। फिलहाल, कलीम खान अंबिकापुर के रेंज साइबर थाने में पदस्थ हैं, लेकिन अब वह एसआई के पद पर कार्य करेंगे।

बिलासपुर जिले में ही पदस्थ रहने के दौरान धोखाधड़ी के एक मामले में आरोपी को गिरफ्तार करने कलीम खान अपनी टीम के साथ दिल्ली गए हुए थे। इस दौरान आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसकी पत्नी को फोन और मैसेज के माध्यम से बुलवा केस कमजोर करने और जमानत दिलवाने के नाम पर रुपयों की मांग का आरोप कलीम खान पर लगा था। इसके अलावा आरोपी की पत्नी ने पति को छोड़ने की एवज में यौन शोषण का आरोप भी टीआई कलीम खान पर लगाया था। एसपी प्रशांत अग्रवाल के कार्यकाल के दौरान आरोपी पकड़ने जाने और रुपयों की मांग तथा यौन शोषण की शिकायत अगले एसपी दीपक झा की पदस्थापना के दौरान हुई थी। शिकायत मिलने पर एसपी दीपक झा ने डीएसपी स्तर के अधिकारी से मामले की प्रारंभिक जांच करवाई। प्रारंभिक जांच (पीई) में मामला प्रमाणित हुआ। इस बीच एसपी दीपक झा का भी तबादला हो गया। दीपक झा के तबादले के बाद अगली बिलासपुर एसपी पारुल माथुर ने प्रारंभिक जांच प्रमाणित होने के चलते विभागीय जांच के आदेश दिए थे। विभागीय जांच पर मामला प्रमाणित हो गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला वर्ष 2020 का है, जब मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलवाने के नाम पर तीन आरोपियों ने मिलकर 82 लाख रुपये की ठगी की थी। इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी के करीब सात माह बाद, वर्ष 2021 में एक आरोपी की पत्नी ने तत्कालीन थाना प्रभारी (टीआई) कलीम खान पर पैसे मांगने और शारीरिक शोषण का आरोप लगाया। उस समय जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) प्रशांत अग्रवाल थे। यह शिकायत उनके कार्यकाल के दौरान दर्ज की गई थी। उनके स्थानांतरण के बाद दीपक झा ने एसपी पद का कार्यभार संभाला और उन्होंने मामले में प्रारंभिक जांच करवाई। जांच में आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए गए, लेकिन जांच पूरी होने से पहले उनका भी तबादला हो गया। इसके पश्चात एसपी पारुल माथुर ने पदभार ग्रहण किया और पूर्व जांच रिपोर्ट के आधार पर विभागीय जांच के आदेश दिए। उनके बाद एसपी संतोष सिंह और फिर रजनेश सिंह ने पदभार संभाला। विभागीय जांच की प्रक्रिया इन सभी के कार्यकाल के दौरान जारी रही। अब विभागीय जांच में आरोप सिद्ध हो जाने के बाद, आईजी संजीव शुक्ला ने निरीक्षक कलीम खान को पदावनत करते हुए एक वर्ष के लिए उप निरीक्षक (सब-इंस्पेक्टर) बना दिया है।

ये है पूरा मामला 

पूरा मामला कोनी थाने से जुड़ा हुआ है। वर्ष 2020 में प्रार्थी तरुण साहू ने एफआईआर करवाते हुए बताया है कि उनकी बेटी और रायगढ़ के उनके मित्र दीपक शर्मा की बेटी को पश्चिम बंगाल के एक निजी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन करवाने के सिलसिले में दोनों 18 अक्टूबर 2020 को दिल्ली गए थे। इस दौरान उनकी आरोपियों से मुलाकात हुई। आरोपियों ने उन्हें रकम मिलने पर एडमिशन करवा देने का आश्वासन दिया। तब तरुण साहू ने अपने झारखंड के टाटानगर निवासी परिचित भागवत वर्मा को भी इसकी जानकारी दी। उनकी बेटी को भी एमबीबीएस में एडमिशन चाहिए था। तरुण साहू, भागवत वर्मा और दीपक शर्मा ने अपने बच्चों का मेडिकल कॉलेज में एडमिशन करवाने के लिए आरोपियों को 82 लाख रुपए दिया था। पर तीनों के बच्चों का मेडिकल कॉलेज में एडमिशन नहीं हुआ और ना हीं ठगों ने रकम लौटाई।

जिस आरोपी को गिरफ्तार करने पर लेनदेन के आरोप में मिली सजा, वह कोरोना में पैरोल लेकर हो गया फरार धोखाधड़ी के आरोपी की गिरफ्तारी के सात माह बाद उसकी पत्नी ने टीआई कलीम खान के खिलाफ शिकायत की। वही आरोपी खुद कोरोना के समय पैरोल लेकर जेल से निकला था और फरार हो गया। जिसकी गिरफ्तारी अब तक नहीं हो पाई है।

आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिला था

रायपुर में एक चर्चित मामले का खुलासा कर आरोपी की गिरफ्तारी करने पर कलीम खान को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया गया था, जिसके तहत उन्हें उप निरीक्षक से पदोन्नत कर निरीक्षक बनाया गया। उप निरीक्षक स्तर पर यह संभवतः प्रदेश का पहला ऐसा मामला था जिसमें मैदानी क्षेत्र में किए गए कार्य के लिए, नक्सल प्रभावित क्षेत्र के बाहर, ओटी प्रमोशन प्रदान किया गया था। हालांकि, अब उन्हें पुनः निरीक्षक से एक वर्ष के लिए उप निरीक्षक पद पर वापस कर दिया गया है।

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