Wednesday, February 11, 2026
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पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का तीखा हमला: किसानों, युवाओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार को घेरा, कहा– किसानों से नाइंसाफी, हर तरफ ‘सांय-सांय’, रोजगार गायब….

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शुक्रवार को अपने निजी प्रवास पर बिलासपुर पहुंचे, जहां वे कई व्यक्तिगत कार्यक्रमों में शामिल हुए और कांग्रेस नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए राज्य और केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने सरकार की नीतियों को किसान, आदिवासी, युवा और शिक्षा विरोधी करार दिया।

भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों को हतोत्साहित करने की साजिश कर रही है, ताकि धान खरीदी से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि धान की नीलामी में जानबूझकर देरी की जा रही है, जिससे किसानों को प्रति क्विंटल 500 से 600 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने बताया कि खाद की उपलब्धता संकटग्रस्त है, सोसायटियों में DAP नहीं है और किसानों को बीज भी नहीं मिल रहा। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले साल के धान का उठाव अभी तक नहीं हुआ है, जिससे सरकार की किसान विरोधी मंशा उजागर होती है।

बघेल ने बिजली कटौती और बढ़ती बेरोजगारी को भी गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगातार बिजली संकट गहराता जा रहा है और बेरोजगारी के कारण हजारों युवक-युवतियों को बस्तर से पलायन करना पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि लगभग 30 से 40 हजार युवा काम की तलाश में अन्य राज्यों में गए हुए है। आदिवासी समाज को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई। उनका कहना था कि राज्य सरकार आदिवासी विरोधी रवैया अपना रही है। कई आदिवासी युवक-युवतियों को झूठे मामलों में जेल में डाला जा रहा है और दहशत का माहौल बना हुआ है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए पूछा कि क्या वे जीरम घाटी हमले के आरोपियों को लेकर किए गए वादे पर कोई जवाब देंगे? उन्होंने कहा कि पीएम ने 15 दिन में आरोपियों को जेल भेजने की बात कही थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

शिक्षा व्यवस्था पर बोलते हुए बघेल ने कहा कि 16 जून से नए शिक्षा सत्र की शुरुआत हो रही है, लेकिन पूरे विभाग में अव्यवस्था फैली है। हजारों स्कूल बंद किए जा रहे हैं और शिक्षकों की नियुक्ति में भारी कटौती की जा रही है। उन्होंने कहा कि “शाला बंद, मधुशाला चालू” सरकार की असली नीति बन गई है।

महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने महतारी वंदन योजना का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार इस योजना की राशि समय पर नहीं दे पा रही है। और सरकार के द्वारा 70 हजार महिलाओं के सूची से नाम को हटा दिए गए हैं।

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