
बालोद। जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह से सख्त रुख अपनाए हुए है। “नो हेलमेट-नो पेट्रोल” अभियान को प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन लगातार निगरानी और कार्रवाई कर रहा है। इसी कड़ी में बड़ी कार्रवाई करते हुए बालोद प्रशासन ने लाटाबोड़ स्थित केकेएस पेट्रोल पंप को सील कर दिया। एसडीएम नूतन कंवर ने यह कार्रवाई कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देश पर की। बताया जा रहा है कि इस कदम से पेट्रोल पंप संचालकों में हड़कंप मच गया है और जिलेभर में इस घटना की चर्चा जोरों पर है।

जानिए कैसे हुआ खुलासा
एसडीएम नूतन कंवर ने जानकारी दी कि पंप के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि वहां पर बिना हेलमेट लगाए दोपहिया चालकों को पेट्रोल दिया जा रहा है। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने मौके पर निरीक्षण किया और ढाई घंटे के सीसीटीवी फुटेज की जांच की। फुटेज से यह साफ हो गया कि पंप संचालक नियमों की खुलकर अनदेखी कर रहा था। नियमों का उल्लंघन सामने आने पर प्रशासन ने पंप को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया।

अभियान की शुरुआत और उद्देश्य
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने 1 अगस्त 2025 को इस अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान का मकसद सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और लोगों को यातायात नियमों का पालन करने के लिए जागरूक करना है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि हेलमेट पहनने से सड़क हादसों में गंभीर चोटों और मौत के मामलों को काफी हद तक रोका जा सकता है। प्रशासन ने इस अभियान को सड़क सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल बताया है।

कलेक्टर की सख्त हिदायत
कलेक्टर ने जिले के सभी पेट्रोल पंप संचालकों को पहले ही निर्देश दे दिए थे कि वे बिना हेलमेट वालों को पेट्रोल नहीं देंगे। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि कोई भी पंप इस आदेश की अनदेखी करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। प्रशासन का कहना है कि यह केवल आदेश नहीं बल्कि सड़क सुरक्षा की दिशा में उठाया गया ठोस कदम है, जिसे किसी भी हालत में हल्के में नहीं लिया जाएगा।

संचालकों और आम जनता की प्रतिक्रिया
पंप सील किए जाने की घटना के बाद जिलेभर के अन्य पेट्रोल पंप संचालक सतर्क हो गए हैं। अब कई पंपों पर कर्मचारी साफ इनकार कर रहे हैं कि वे बिना हेलमेट वालों को पेट्रोल नहीं देंगे। इस कार्रवाई के बाद आम लोगों में भी संदेश गया है कि यातायात नियमों का पालन करना उनकी अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी है। हालांकि, इस कदम पर जनता की प्रतिक्रिया मिश्रित रही। कुछ लोगों ने इसे सराहनीय बताया और कहा कि इससे सड़क पर अनुशासन बढ़ेगा और हादसों में कमी आएगी। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि प्रशासन को इतनी कठोर कार्रवाई करने से पहले व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाना चाहिए था।
सड़क सुरक्षा पर प्रशासन की प्राथमिकता
अधिकारियों का कहना है कि सड़क हादसों को रोकना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशासन मानता है कि केवल कानून बनाकर दुर्घटनाओं को नहीं रोका जा सकता, बल्कि उसके पालन को सुनिश्चित करने के लिए सख्ती जरूरी है। इसी वजह से आने वाले दिनों में भी नियमों का उल्लंघन करने वाले पेट्रोल पंप संचालकों और वाहन चालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना साफ संकेत देती है कि जिला प्रशासन सड़क सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। एक ओर जहां पंप संचालकों में सतर्कता आई है, वहीं दूसरी ओर लोगों में भी यह संदेश गया है कि सड़क पर सुरक्षित रहने के लिए नियमों का पालन करना अनिवार्य है। यह अभियान न सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई है, बल्कि आम लोगों की जिंदगी बचाने की दिशा में गंभीर प्रयास भी है।
