
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में बुधवार देर रात हुई जोरदार बारिश ने शहर की कमज़ोर व्यवस्थाओं को उजागर कर दिया। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए बेहतर ड्रेनेज सिस्टम के दावों की हकीकत महज़ कुछ घंटों की बारिश में सामने आ गई। पूरा शहर मानो तालाब में तब्दील हो गया। कॉलोनियों से लेकर मुख्य बाज़ार तक हर जगह पानी ही पानी दिखाई दिया।
बारिश का पानी घुटनों तक जमा हो जाने से लोगों की दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो गई। आम नागरिकों को घरों से बाहर निकलना दुश्वार हो गया। बच्चे इस स्थिति को खेल की तरह लेते हुए ट्यूब लेकर पानी में तैरने लगे, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बच्चों की सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक है। कई जगहों पर गाड़ियों के इंजन बंद हो गए, जिससे मुख्य सड़कों पर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया।
स्थानीय नागरिकों ने नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा कि शहर में जल निकासी की व्यवस्था बेहद खराब है। नालियों की सफाई समय पर नहीं होने के कारण बारिश का पानी सीधे घरों और दुकानों में घुस रहा है। व्यापारी वर्ग भी परेशान है क्योंकि उनका सामान पानी में खराब हो गया। यह स्थिति हर साल बारिश के मौसम में देखने को मिलती है, मगर नगर निगम स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाता।
लोगों का कहना है कि स्मार्ट सिटी के नाम पर बड़ी-बड़ी योजनाओं का दावा किया गया, लेकिन हकीकत यह है कि थोड़ी सी भी तेज बारिश होते ही पूरा शहर ठप हो जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी चेतावनी दी है कि ऐसे हालात में डेंगू, मलेरिया और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
मुख्य बाज़ार, नेहरू चौक, तोरवा, सरकंडा और तखतपुर रोड जैसी प्रमुख जगहों पर जलभराव से आवागमन पूरी तरह प्रभावित रहा। कई वाहन पानी में फंसे रहे और लोग घंटों तक परेशान होते रहे। नागरिकों का कहना है कि निगम अधिकारी बारिश से पहले केवल कागज़ों पर तैयारी पूरी दिखाते हैं, जबकि हकीकत में हालात जस के तस बने रहते हैं।

शहरवासी सवाल उठा रहे हैं कि जब दो दिन की बारिश ने ही शहर को डुबो दिया तो आने वाले दिनों में भारी बारिश से क्या हालात होंगे? लोग अब इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अगर जल्द ही नगर निगम ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो बिलासपुर में स्थिति भयावह हो सकती है।
