Wednesday, February 11, 2026
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जादुई कलश के नाम पर करोड़ों की ठगी, आरोपियों ने बनाई थी कंपनी, फिर महंगे धातु से बने ‘जादुई कलश’ की झूठी कहानी गढ़कर ठगते रहे ग्रामीणों को, 4 गिरफ्तार – 2 आरोपी फरार…

जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से एक बड़ा ठगी का मामला सामने आया है। यहां जादुई कलश के नाम पर हजारों ग्रामीणों से करोड़ों रुपये की ठगी की गई। पुलिस ने गिरोह के चार ठगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि दो आरोपी अब भी फरार हैं, जिनकी तलाश तेज़ी से की जा रही है। पुलिस का कहना है कि ठगों ने कई जिलों में लोगों को लालच देकर करोड़ों की वसूली की है और अब तक की जांच में 1 करोड़ 94 लाख रुपये की ठगी सामने आई है, हालांकि पुलिस को अंदेशा है कि यह रकम और भी ज्यादा हो सकती है।

कैसे रची गई साज़िश

मामला वर्ष 2021 से शुरू होता है। आरोपियों ने ‘आरपी ग्रुप’ नाम से एक कंपनी बनाई। इसके मुख्य संचालक तुरेंद्र उर्फ मनीष कुमार दिव्य और राजेंद्र कुमार दिव्य थे, जिनके साथ प्रकाश चंद्र धृतलहरे और उपेंद्र कुमार सारथी भी जुड़े थे। आरोपियों ने ग्रामीणों को यह विश्वास दिलाया कि कोरबा जिले के मंडवारानी इलाके में उन्हें एक ‘जादुई कलश’ मिला है। बताया गया कि इस कलश में ऐसे गुण हैं, जो धातुओं की पहचान कर सकता है और चावल को अपनी ओर खींच लेता है।

आरोपियों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि यह कलश बेहद दुर्लभ और अरबों की कीमत का है, जिसे विदेशों में बेचा जाएगा। बिक्री के बाद प्राप्त मुनाफे को उन सभी लोगों में बांटा जाएगा, जो आरपी ग्रुप से जुड़ेंगे। झांसे में आकर हजारों लोग कंपनी से जुड़े और सिक्यूरिटी मनी व प्रोसेसिंग फीस के नाम पर 25 हजार से लेकर 70 हजार रुपये तक जमा कराए।

शिकायत कैसे हुई दर्ज

कांसाबेल क्षेत्र की रहने वाली अमृता बाई ने 7 सितंबर 2024 को थाना पत्थलगांव में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में वे भी ठगों के झांसे में आ गईं और 25 हजार रुपये जमा कर दिए। लेकिन वादा किए अनुसार न तो कोई मुनाफा मिला और न ही जमा की गई राशि वापस हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने भादवि की धारा 420, 34 के तहत अपराध दर्ज किया और जांच शुरू की।

पुलिस की कार्रवाई

जशपुर एसएसपी शशि मोहन सिंह ने मामले की गंभीरता देखते हुए एक विशेष पुलिस टीम गठित की। टीम को बिलासपुर, कोरबा और सीतापुर भेजा गया। वहां दबिश देकर मुख्य आरोपी राजेंद्र कुमार दिव्य, तुरेंद्र उर्फ मनीष कुमार दिव्य, प्रकाश चंद्र धृतलहरे और उपेंद्र कुमार सारथी को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने उनके पास से दस्तावेज, मोबाइल फोन और एक कार जब्त की है, जिसकी कीमत लगभग 13 लाख रुपये बताई जा रही है।

पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि उन्हें यह आइडिया उनके साथी महेंद्र बहादुर सिंह ठाकुर ने दिया था। उसने बताया था कि कलश महंगे धातु का बना है और विदेशों में इसकी कीमत अरबों रुपये हो सकती है। इसके बाद सभी ने मिलकर एक संगठित योजना बनाई और ग्रामीणों से मोटी रकम वसूलने लगे।

कितने जिलों में हुई ठगी

पुलिस जांच में अब तक सामने आया है कि ठगों ने जशपुर, सरगुजा, कोरबा, रायगढ़ और बिलासपुर जिलों में ग्रामीणों को शिकार बनाया। उनसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो लेकर केवाईसी प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर पैसे वसूले गए। अब तक 1 करोड़ 94 लाख रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है, लेकिन पुलिस को संदेह है कि यह आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है।

 आरोपी नाम

1. राजेंद कुमार दिव्य (46 वर्ष) – ग्राम जोरहा डबरी, जिला कोरबा निवासी।

2. तुरेंद्र उर्फ मनीष कुमार दिव्य (38 वर्ष) – ग्राम जोरहा डबरी, जिला कोरबा निवासी।

3. प्रकाश चंद्र धृतलहरे (40 वर्ष) – ग्राम गोढ़ीकला, जिला जशपुर निवासी।

4. उपेंद्र कुमार सारथी (56 वर्ष) – ग्राम लीचीरमा, जिला सरगुजा निवासी।

चारों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया है। वहीं, महेंद्र बहादुर सिंह ठाकुर और एक अन्य आरोपी अब भी फरार हैं, जिनकी तलाश के लिए पुलिस की कई टीमें जुटी हुई हैं।

आगे की जांच

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ठगी की रकम लगातार बढ़ सकती है क्योंकि कई पीड़ित ग्रामीण अब भी सामने आ रहे हैं। मामले की जांच जारी है और ठगों के बैंक खातों व अन्य संपत्तियों का भी पता लगाया जा रहा है।

यह मामला न केवल ठगी का बड़ा उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि लालच और अंधविश्वास कैसे लोगों को आर्थिक जाल में फंसा सकता है। पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के चमत्कारी दावे या निवेश योजनाओं में फंसने से पहले सतर्क रहें और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत सूचना पुलिस को दें।

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