
बेमेतरा। जिले के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल में कार्यरत सात प्री-प्राइमरी शिक्षिकाओं और चार आया को अचानक सेवा से मुक्त कर दिया गया। रविवार के दिन जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय में बुलाकर सभी को बर्खास्तगी आदेश सौंपा गया। इस दौरान एक शिक्षिका की तबीयत बिगड़ने से वह वहीं बेहोश हो गईं।

जानकारी के अनुसार, इन शिक्षिकाओं और आया की नियुक्ति वर्ष 2022-23 में खनिज न्यास निधि (DMF Fund) के माध्यम से की गई थी। इनका मानदेय भी इसी फंड से दिया जा रहा था, लेकिन पिछले एक वर्ष से अधिक समय से कई शिक्षिकाओं को भुगतान नहीं हुआ। लगातार आवेदन और शिकायतों के बावजूद विभाग ने कोई समाधान नहीं किया।
फंड की कमी का हवाला, लेकिन स्कूलों में 50% पद रिक्त
जिले के आत्मानंद स्कूलों में शिक्षकों के आधे से ज्यादा पद रिक्त हैं। ऐसे में “फंड की कमी” बताकर शिक्षिकाओं को हटाने का फैसला सवालों के घेरे में है। वहीं, DMF फंड के दुरुपयोग की शिकायतें पहले से ही प्रशासन के पास दर्ज हैं।
शिक्षिकाओं का दर्द — “तीन साल से पढ़ा रही हूं, अब कह रहे हैं फंड नहीं है”
बेरला आत्मानंद स्कूल की शिक्षिका वर्षा चौबे ने कहा —
“हमें प्रिंसिपल के जरिए डीईओ ऑफिस बुलाया गया और सेवा समाप्ति का नोटिस दे दिया गया। मैं तीन साल से 70 बच्चों को अकेले पढ़ा रही हूं। अब अचानक कहा जा रहा है कि फंड नहीं है, इसलिए हमें हटा दिया गया।”
बेमेतरा स्कूल की शिक्षिका सविता ने बताया —
“मैं सात महीने से लगातार पढ़ा रही हूं, लेकिन आज तक एक रुपये वेतन नहीं मिला। रविवार को बुलाकर सेवा समाप्ति पत्र थमा दिया गया।”
विभाग का बयान
डीईओ कार्यालय की ओर से कहा गया —
“शिक्षिकाएं और आया नियमित कर्मचारी नहीं हैं। जिला खनिज न्यास निधि और अन्य स्रोतों से भुगतान संभव नहीं हो पा रहा है, इसलिए सेवाएं समाप्त करनी पड़ीं। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए जल्द नई नियुक्तियां की जाएंगी। लंबित मानदेय का भुगतान भी शीघ्र किया जाएगा।”
राजनीतिक प्रतिक्रिया
जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक आशीष छाबड़ा ने इस कार्रवाई को “अमानवीय और योजनाबद्ध” बताया। उन्होंने कहा —
“रविवार के अवकाश के दिन शिक्षिकाओं को बुलाकर सेवा समाप्ति का आदेश देना निंदनीय है। फंड की कमी का बहाना बनाकर DMF फंड में हो रही गड़बड़ियों को छिपाने की कोशिश की जा रही है।”
मानसिक आघात और रोजी-रोटी का संकट
बर्खास्त शिक्षिकाओं का कहना है कि उन्होंने पूरे समर्पण से विभाग का काम किया, लेकिन अचानक सेवा से पृथक कर दिए जाने से वे मानसिक रूप से टूट चुकी हैं। साथ ही अब उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

