
बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के आवापल्ली स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सोमवार सुबह उस वक्त हंगामे की स्थिति बन गई, जब इलाज के दौरान दो माह के मासूम बच्चे की मौत हो गई। घटना के बाद गुस्साए परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए और जमकर हंगामा किया।

जानकारी के अनुसार, आवापल्ली से लगे मुर्दोंडा गांव के निवासी एक दंपती अपने दो माह के बच्चे को लेकर सुबह करीब नौ बजे अस्पताल पहुंचे थे। बच्चे को पिछले दो दिनों से सर्दी-जुकाम और सांस लेने में परेशानी हो रही थी। परिजनों का कहना है कि बच्चे की हालत बिगड़ने पर वे तुरंत अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां डॉक्टर मौजूद नहीं थे।

परिजनों ने बताया कि ओपीडी में पर्ची बनाने के बाद उन्हें वार्ड में भेजा गया, जहां नर्सों ने फोन पर डॉक्टर से बात करते हुए दवा और इंजेक्शन लगाने का निर्देश लिया। करीब डेढ़ घंटे तक बच्चे का इलाज चलता रहा, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। अंततः बच्चे ने दम तोड़ दिया।

बच्चे की मौत के बाद परिवार फूट-फूटकर रोने लगा और कुछ देर बाद उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया। गुस्साए लोगों ने कहा कि अगर डॉक्टर समय पर मौजूद रहते तो शायद बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।

वहीं, अस्पताल के प्रभारी डॉ. हर्षवर्धन, बीएमओ आवापल्ली ने लापरवाही के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उनका कहना है कि बच्चे को गंभीर स्थिति में अस्पताल लाया गया था और मेडिकल टीम ने हर संभव प्रयास किया। “हमने तत्काल उपचार शुरू किया था, ऑक्सीजन सपोर्ट भी दिया गया, लेकिन बच्चे की हालत पहले से बहुत गंभीर थी,” उन्होंने कहा।

इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग में भी हलचल मच गई है। बताया जा रहा है कि जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की है और प्राथमिक जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
फिलहाल मासूम की मौत से इलाके में शोक और आक्रोश दोनों का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि आवापल्ली अस्पताल में लंबे समय से डॉक्टरों की अनुपस्थिति की समस्या बनी हुई है, जिसके कारण मरीजों को अक्सर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लोग मांग कर रहे हैं कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे।
