Wednesday, February 11, 2026
Homeअन्य खबरेबिलासपुर रेल हादसा: मई की लापरवाही ने ली 11 यात्रियों की जान,...

बिलासपुर रेल हादसा: मई की लापरवाही ने ली 11 यात्रियों की जान, फिर दोहराई गई वही गलती..!

बिलासपुर। रेल सुरक्षा व्यवस्था पर फिर बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है। मई 2025 की वही घटना, जो तब एक बड़ी त्रासदी बनते-बनते टल गई थी, अब मौत बनकर लौटी है। तब बिलासपुर से कोरबा जा रही मेमू ट्रेन गलत सिग्नल के कारण कोयला खदान की लोडिंग साइडिंग तक पहुंच गई थी। रेलवे ने तत्काल ट्रेन को वापस बुलाकर स्थिति संभाल ली थी। लेकिन इस बार वैसा नहीं हुआ — इस बार हादसे ने 11 जिंदगियां निगल लीं।

लोको पायलट की मौके पर मौत हो गई, जबकि सह पायलट रश्मि राज गंभीर रूप से घायल हैं और अपोलो अस्पताल में उनका इलाज जारी है।

भयावह मंजर और सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरें
घटना के बाद सोशल मीडिया पर हादसे की भयावह तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं। मेमू ट्रेन का इंजन अपनी हालत खुद बयान कर रहा है — लोहे का ढांचा बुरी तरह पिचक गया, जैसे किसी ने उसे मोड़ दिया हो। लोको पायलट और सह पायलट को गैस कटर से काटकर बाहर निकाला गया। मौके पर अफरा-तफरी का माहौल था, चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ था।

राहत और बचाव कार्य पूरी रात चलता रहा। घायलों को रेलवे अस्पताल के साथ-साथ निजी और सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। अब घटनास्थल पर शांति है, लेकिन वहां की खामोशी बहुत कुछ कह रही है — केवल रेलवे के तकनीकी अमले की आवाजें सन्नाटे को तोड़ रही हैं।

परिजनों का दर्द और अव्यवस्था पर नाराजगी
घायलों के परिजन अस्पतालों में अपने लोगों की जानकारी के लिए भटकते रहे। रेलवे अस्पताल में पर्याप्त व्यवस्था न होने से कई मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजा गया, जिससे परिजनों की परेशानियां और बढ़ गईं।

2025 में लगातार तीन से अधिक हादसे, रेल सुरक्षा पर गंभीर सवाल
इस साल छत्तीसगढ़ और आसपास के रेल मार्गों पर एक के बाद एक हादसे हो रहे हैं —

  • मड़वारानी स्टेशन (अक्टूबर 2025) – छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस के पहियों में लोहे का एंगल फंसने से बड़ा हादसा टला।
  • दल्लीराजहरा (जून 2025) – रेल पटरी किनारे बैठे पांच युवकों में दो की ट्रेन की चपेट में आकर मौत।
  • उज्जैन (अप्रैल 2025) – बीकानेर से बिलासपुर आ रही ट्रेन में आग, दो डिब्बे जलकर राख, सौभाग्य से कोई जनहानि नहीं।
  • बिलासपुर (मई 2025) – गलत सिग्नल से मेमू ट्रेन कोयला खदान तक जा पहुंची — तब बच गए, अब वही गलती मौत बन गई।

अब सवाल उठता है:
कब सुधरेगी रेल सिग्नलिंग और तकनीकी सुरक्षा प्रणाली? यात्रियों की जान आखिर कब तक ऐसे हादसों की भेंट चढ़ती रहेगी?

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Posts