
बिलासपुर। बिलासपुर में हाल ही हुए रेल हादसे को लेकर आज कांग्रेस कार्यकर्ता और नेताओं ने रेलवे जीएम कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। सुबह रामलीला मैदान में जुटे सैकड़ों कांग्रेसियों ने सभा के बाद पैदल मार्च करते हुए जीएम ऑफिस का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान माहौल इतना उग्र हो गया कि पुलिस और आरपीएफ की भारी तैनाती करनी पड़ी। सुरक्षा के लिए कार्यालय के गेट अंदर से बंद कर दिए गए, लेकिन नाराज़ कार्यकर्ताओं ने गेट पर चढ़कर जमकर नारेबाजी की।
मृतकों को 1 करोड़ और घायलों को 50 लाख मुआवजे की मांग
कांग्रेस ने मृतकों के परिजनों को 1-1 करोड़, गंभीर घायलों को 50-50 लाख और आश्रितों को नौकरी देने की मांग की। नेताओं का आरोप है कि रेलवे हादसे की रिपोर्ट छिपाने में जुटा हुआ है और पीड़ितों को न्याय नहीं मिल रहा है। अपोलो अस्पताल में भर्ती मासूम बच्चे का मुद्दा भी प्रदर्शन के दौरान बार-बार उठा, जिसे नेताओं ने “अमानवीय लापरवाही” बताया। प्रदर्शनकारियों ने रेलवे अधिकारी समीरकांत माथुर को ज्ञापन भी सौंपा।
रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की तो उग्र आंदोलन की चेतावनी
कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि जांच रिपोर्ट तुरंत सार्वजनिक नहीं की गई और जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में इससे भी व्यापक आंदोलन शुरू किए जाएंगे। नेताओं ने तंज कसते हुए कहा––“अवार्ड लेने में रेलवे आगे रहता है, लेकिन जिम्मेदारी तय होते ही दरवाजे बंद कर लेता है।”
कैसे हुआ था हादसा?
4 नवंबर की शाम कोरबा से बिलासपुर आ रही तेज रफ्तार पैसेंजर ट्रेन गतौरा और लालखदान के बीच दुर्घटनाग्रस्त हो गई। पैसेंजर ट्रेन को जिस ट्रैक से गुजरना था, उसी लाइन पर पहले से एक मालगाड़ी खड़ी थी। शुरुआती जानकारी के अनुसार, सिग्नल सिस्टम की गड़बड़ी या मानवीय गलती के कारण पैसेंजर ट्रेन को खतरे का संकेत नहीं मिल सका। परिणामस्वरूप तेज रफ्तार ट्रेन मालगाड़ी से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि पैसेंजर ट्रेन का इंजन मालगाड़ी पर चढ़ गया और बोगियों में बैठे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई।



