
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के नेहरू चौक में रविवार दोपहर उस समय माहौल अचानक गरमा गया, जब कांग्रेस नेताओं ने पुलिस की कड़ी निगरानी के बावजूद मुख्यमंत्री का पुतला जला दिया। दिलचस्प यह रहा कि पुलिस की मौजूदगी को भांपते हुए नेताओं ने ऐसा चकमा दिया कि जवान देखते ही रह गए और पुतला धू-धू कर जल उठा।

कांग्रेस के नए शहर जिलाध्यक्ष सुधांशु मिश्रा और ग्रामीण जिलाध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री ने नियुक्ति के सिर्फ दूसरे दिन ही राज्य सरकार के खिलाफ ज़ोरदार प्रदर्शन करते हुए अपने नेतृत्व की धमाकेदार शुरुआत कर दी। वहीं, पूर्व अध्यक्ष विजय केशरवानी, विजय पांडेय, समीर अहमद बबला सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता प्रदर्शन में शामिल हुए।

प्रदर्शनकारी जब कांग्रेस भवन से पुतला लेकर निकले तो पुलिस पहले से ही चौकन्नी थी। नेहरू चौक से पहले ही बड़ी संख्या में जवान तैनात थे ताकि पुतला दहन न हो सके। लेकिन कांग्रेस नेताओं ने रणनीति पहले ही बना रखी थी। चौक पहुंचने से पहले ही उन्होंने अचानक रुककर पुतला जला दिया। पुलिस जवान बुझाने दौड़े, लेकिन तब तक पुतला राख हो चुका था।

यहीं नहीं रुके—कांग्रेसी दूसरे रास्ते से एक और पुतला ले आए और उसे भी आग के हवाले कर दिया। पुलिस के हाथ सिर्फ खाली ढांचा ही लगा। शहर के लगभग सभी थाना प्रभारियों को नेहरू चौक में तैनात किया गया था, लेकिन कांग्रेस का तगड़ा ‘पॉलिटिकल मास्टर स्ट्रोक’ पुलिस पर भारी पड़ गया।
शहर अध्यक्ष सुधांशु मिश्रा का बयान
सुधांशु मिश्रा ने कहा—
“नवनियुक्त जिम्मेदारी मिलते ही यह हमारा पहला कर्तव्य है कि जनता की आवाज सरकार तक पहुंचाई जाए। राज्य सरकार हर मोर्चे पर विफल है—युवा परेशान हैं, किसान ठगा हुआ महसूस कर रहा है, और कानून-व्यवस्था चरमराई हुई है। आज का प्रदर्शन सरकार को चेतावनी है कि कांग्रेस सड़क पर उतरकर जनता के मुद्दों पर लड़ाई तेज करेगी।”
यह अनोखी ‘पुतला-चकमा रणनीति’ दिनभर शहर में चर्चा का विषय बनी रही।
