
बलौदा बाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले से एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहां ठंड से बचने के लिए जलाए गए अलाव ने एक महिला की जिंदगी ही छीन ली। सुहेला थाना क्षेत्र में सड़क किनारे झोपड़ी बनाकर रहने वाली महिला की झोपड़ी में अचानक आग लग गई, जिसमें झुलसकर उसकी मौत हो गई। घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी है, जबकि पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

ठंड से बचने के लिए जलाया अलाव बना मौत की वजह
जानकारी के अनुसार, मृतका आशा बाई कबाड़ बिनने का काम करती थी और झोपड़ी में अकेली रहती थी। बुधवार रात ठंड से परेशान होकर उसने झोपड़ी के भीतर ही अलाव जलाया था ताकि गर्मी मिल सके। लेकिन अलाव की चिंगारी कब कंबल और झोपड़ी के तिनकों में फैल गई, यह उसे पता ही नहीं चला। गहरी नींद में होने के कारण वह समय रहते बाहर नहीं निकल सकी।
कुछ ही मिनटों में आग की लपटों ने पूरी झोपड़ी को अपने आगोश में ले लिया और आशा बाई बाहर आने का मौका भी नहीं पा सकी। आग इतनी भीषण थी कि झोपड़ी देखते ही देखते राख में बदल गई।

सुबह धुआं देखकर लोगों ने दी सूचना
गुरुवार सुबह स्थानीय लोगों ने झोपड़ी से उठता धुआं देखा तो भागते हुए नजदीक पहुंचे। अंदर जला हुआ सामान और आधा जला शव देखकर तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। सुहेला थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पुलिस ने शुरुआती जांच में अलाव से फैली आग को हादसे का प्राथमिक कारण माना है। आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच जारी है।

ठंड में अलाव का खतरा—कोरबा में भी हुई थी इसी तरह की त्रासदी
इससे पहले कोरबा जिले के करतला थाना क्षेत्र में भी एक ऐसा ही हादसा हुआ था। वहां 72 वर्षीय मंशीदास महंत अपने परिवार के साथ अलाव तापने के बाद कंबल ओढ़कर सो गया था। देर रात कंबल में आग लग गई और देखते ही देखते आग ने बुजुर्ग को अपनी चपेट में ले लिया। 80 प्रतिशत झुलस चुके बुजुर्ग को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
दोनों घटनाओं ने यह चेतावनी दे दी है कि सर्दी के मौसम में अलाव का उपयोग सावधानी के बिना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है, खासकर जब लोग झोपड़ी या कच्चे घरों में रहते हों जहां आग तेजी से फैलती है।

पुलिस जांच जारी, ग्रामीणों में भय और दुख का माहौल
बलौदा बाजार की इस घटना ने स्थानीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस ने आसपास के लोगों के बयान लेने शुरू कर दिए हैं और यह भी जांच कर रही है कि झोपड़ी में आग कितनी देर तक लगती रही और कोई बचाव की संभावना क्यों नहीं बन पाई।
मृतका आशा बाई के पड़ोसियों ने बताया कि वह अक्सर ठंड में अलाव जलाती थी क्योंकि उसके पास पर्याप्त कंबल या अन्य गर्म कपड़े नहीं थे। गरीबी और कठिन हालात ने उसकी जिंदगी को पहले ही मुश्किल बना रखा था, और अब यह हादसा उसकी जीवन यात्रा का अंत बन गया।
