Wednesday, February 11, 2026
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CIMS अस्पताल में एक और बावल : लैब टेक्नीशियन ने जूनियर डॉक्टर को पीटा… डॉक्टरों ने की हड़ताल… स्वास्थ्य सुविधाएं ठप्प…!!!

बिलासपुर। बिलासपुर जिले के सिम्स अस्पताल में इंटर्नशिप कर रही एक छात्रा के साथ टेक्नीशियन द्वारा की गई मारपीट का मामला सामने आया है, जिसने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार यह घटना शुक्रवार दोपहर रेडियोलोजी विभाग में हुई। छात्रा अपने इंटर्न कामों में व्यस्त थी, तभी टेक्नीशियन मनीष कुमार सोनी वहां पहुंचा। दोनों के बीच पहले कुछ हल्की कहासुनी हुई, जो जल्द ही विवाद में बदल गई। इसके बाद गुस्साए मनीष कुमार सोनी ने छात्रा पर कई थप्पड़ मार दिए। घटना इतनी अचानक हुई कि मौके पर मौजूद अन्य लोग भी चौंक गए और किसी को बीच-बचाव का मौका नहीं मिला।

छात्रा मानसिक रूप से आहत होकर सीधे सिम्स के डीन और मेडिकल सुपरिंटेंडेंट से शिकायत करने गई। इसके बाद प्रशासन ने करीब एक घंटे तक मामले पर बैठक की, लेकिन अब तक टेक्नीशियन मनीष कुमार सोनी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इस मामले ने न केवल पीड़ित छात्रा बल्कि अन्य इंटर्न और मेडिकल छात्रों में भी नाराजगी और आक्रोश पैदा कर दिया है।

यह घटना सिम्स अस्पताल में हाल ही में सामने आए अन्य विवादों की श्रृंखला का हिस्सा है। इससे पहले भी अस्पताल में कई गंभीर मामले सामने आए हैं। पिछले साल एक पीजी छात्रा ने एचओडी डॉक्टर पंकज टेंभूर्णीकर पर छेड़छाड़ और धमकी देने का आरोप लगाया था। उस समय भी सिम्स प्रशासन ने शिकायतकर्ता छात्रा के खिलाफ दबाव बनाने की कोशिश की, ताकि वह शिकायत वापस ले। केवल उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करने और चिकित्सा शिक्षा विभाग के हस्तक्षेप के बाद ही आरोपी डॉक्टर को सिम्स से हटाकर अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया।

सिम्स में यह पहला मामला नहीं है जब छात्रों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की अनदेखी की गई हो। इससे पहले एक एमबीबीएस छात्रा, जो शादी में शामिल होने बिलासपुर आई थी, रात सिम्स में रुकी और उसी दौरान उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस तरह की घटनाओं से अस्पताल प्रबंधन की कमियों और सुरक्षा की गंभीर चुनौतियों का पता चलता है।

छात्राओं और इंटर्न्स के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करना मेडिकल संस्थानों की जिम्मेदारी है। लगातार ऐसे मामले सामने आने के बावजूद यदि प्रशासन निष्क्रिय रहता है, तो यह छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके करियर पर गहरा असर डाल सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि सिम्स प्रबंधन इस ताजा मामले में दोषी टेक्नीशियन के खिलाफ कितनी तेज़ और प्रभावी कार्रवाई करता है, और छात्रों के विश्वास को बहाल करने के लिए क्या कदम उठाता है।

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