
जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने न्यायालय परिसर में कार्यरत कर्मचारियों की भूमिका और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला चांपा स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी न्यायालय से जुड़ा है, जहां पदस्थ एक कोर्ट मोहर्रिर पर रिश्वत मांगने और अभद्रता करने के आरोप लगे हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, महिला अधिवक्ता प्रियंका ने पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया कि न्यायालय में पदस्थ आरक्षक रंजीत कुमार अनंत ने उनसे काम के बदले 3 हजार रुपये की मांग की। आरोप है कि आरक्षक ने फोन-पे के माध्यम से 1 हजार रुपये भी प्राप्त किए। जब अधिवक्ता ने शेष रकम देने से इनकार किया, तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया।

न्यायिक प्रक्रिया का उल्लंघन करने का आरोप
शिकायत में अधिवक्ता प्रियंका ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि संबंधित आरक्षक ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए न्यायिक नियमों और प्रक्रिया का उल्लंघन किया। यह कृत्य न केवल गैरकानूनी है, बल्कि न्यायालय की गरिमा को भी ठेस पहुंचाने वाला है।

एसपी ने की त्वरित कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक जांजगीर-चांपा विजय कुमार पाण्डेय ने तत्काल प्रभाव से आरक्षक रंजीत कुमार अनंत को निलंबित कर दिया है। साथ ही उसे रक्षित केंद्र जांजगीर-चांपा में अटैच किया गया है। मामले की विभागीय जांच की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। यह घटना न्यायालय परिसर में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करती है।
