बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के शासकीय विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्कूल परिसरों में बढ़ते आवारा कुत्तों और मवेशियों के आतंक से छात्र और शिक्षक भय के साए में पढ़ने-पढ़ाने को मजबूर हैं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एनएसयूआई जिला बिलासपुर ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने बताया कि 5 जनवरी 2026 को सकरी क्षेत्र स्थित शासकीय मिडिल स्कूल में एक आवारा कुत्ते ने कक्षा चौथी की छात्रा मोना यादव सहित चार बच्चों पर हमला कर दिया। इस हमले में तीन बच्चों को सिविल अस्पताल और एक बच्चे को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इससे पहले खमरिया और खमतराई के शासकीय स्कूलों में भी इसी तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिस पर माननीय उच्च न्यायालय ने कड़ी टिप्पणी की थी।

इतने स्कूलों में नहीं है बाउंड्रीवाल
संगठन ने जानकारी दी कि जिले के 1843 शासकीय विद्यालयों में से 495 स्कूल अब भी बिना बाउंड्रीवॉल के संचालित हो रहे हैं। इसी वजह से आवारा कुत्ते और मवेशी स्कूल परिसरों में आसानी से प्रवेश कर जाते हैं और बच्चों की जान जोखिम में पड़ जाती है। हालात इतने गंभीर हैं कि सिविल अस्पताल बिलासपुर में प्रतिदिन 40 से अधिक लोगों को रेबीज के इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं।

एनएसयूआई ने आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय के निर्देश और जिला प्रशासन के आदेश के बावजूद अब तक जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। संगठन ने मांग की है कि सभी स्कूलों में बाउंड्रीवॉल, मुख्य गेट और फेंसिंग की व्यवस्था तुरंत की जाए, संवेदनशील स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जाए और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
शिक्षा विभाग को दी चेतावनी
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो एनएसयूआई लोकतांत्रिक और वैधानिक आंदोलन करने को विवश होगा। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन बच्चों की सुरक्षा को गंभीरता से लेगा या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा?
