Wednesday, February 11, 2026
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मनरेगा से गांधी का नाम हटाने पर बवाल, बिलासपुर में टीएस बाबा का केंद्र सरकार पर तीखा हमला, बोले– गरीबों के हक पर कुठाराघात…

बिलासपुर। मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाकर उसे “V.B.G. RAM.G.” किए जाने को लेकर कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इसी कड़ी में शनिवार को कांग्रेस भवन में पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव (टीएस बाबा) ने प्रेसवार्ता कर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला।

सनातन और राम के नाम पर राजनीति का आरोप

प्रेसवार्ता के दौरान मीडिया द्वारा पूछे गए सवाल पर कि भाजपा कांग्रेस को सनातन विरोधी बताती है, इस पर टीएस सिंहदेव ने कहा कि कांग्रेस हिंदू धर्म का एकीकरण करने वाली पार्टी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस राम, कृष्ण और सभी देवी-देवताओं की पूजा करती है।

टीएस बाबा ने सवाल उठाते हुए कहा—

“सनातन क्या है? रामायण, गीता, महाभारत, पुराण और उपनिषद—यही सनातन हैं। लेकिन क्या मनुस्मृति भी सनातन है, जिसमें अनुसूचित जाति के वेद उच्चारण पर सवाल खड़े किए गए हैं?”

उन्होंने कहा कि सनातन का असली अर्थ सत्य है, जो कभी समाप्त नहीं होता।

मनरेगा कानून में बदलाव को बताया मजदूर विरोधी

टीएस सिंहदेव ने कहा कि केंद्र सरकार ने “सुधार” के नाम पर लोकसभा में नया बिल पास कर दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना मनरेगा को अधिकार आधारित योजना से हटाकर एक कंडीशनल और केंद्र-नियंत्रित स्कीम में बदल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले मनरेगा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत कानूनी अधिकार था, लेकिन अब यह पूरी तरह सरकार की मर्जी पर निर्भर हो गई है।

अधिकार से योजना में बदली मनरेगा

उन्होंने बताया कि पहले मजदूरों को काम मांगने का कानूनी अधिकार था, लेकिन नए फ्रेमवर्क में यह अधिकार खत्म कर दिया गया है। अब सरकार तय करेगी कि कब, कितने समय और किन परिस्थितियों में रोजगार मिलेगा। नए सिस्टम के तहत हर साल एक तय अवधि के लिए काम बंद करने की अनुमति होगी, जिससे गरीबों को महीनों तक बेरोजगार रखा जा सकता है।

फंडिंग पैटर्न में बड़ा बदलाव

टीएस बाबा ने कहा कि पहले केंद्र सरकार मनरेगा में 90 प्रतिशत तक फंड देती थी, जिसे अब 60:40 कर दिया गया है।
अब राज्यों को 40 प्रतिशत खर्च उठाना होगा और पहले 50 प्रतिशत राशि जमा करनी होगी, तभी केंद्र फंड जारी करेगा।उन्होंने आरोप लगाया कि इससे राज्यों पर करीब 50 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और मनरेगा धीरे-धीरे बंद होने की कगार पर पहुंच जाएगी।

कोरोना काल में बनी थी गरीबों की लाइफलाइन

टीएस सिंहदेव ने कहा कि मनरेगा पिछले दो दशकों से ग्रामीण गरीबों की जीवनरेखा रही है। कोविड-19 महामारी के दौरान इस योजना ने करोड़ों लोगों को आर्थिक सुरक्षा दी थी। ऐसे में इसके अधिकार कमजोर करना गरीब विरोधी कदम है।

100 दिन की गारंटी सिर्फ कागजों में

उन्होंने सरकार के 100 से 125 दिन रोजगार देने के दावों को “चालाकी” करार दिया। टीएस बाबा के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के करीब 70 प्रतिशत गांवों में भाजपा सरकार आने के बाद अघोषित रूप से मनरेगा कार्य बंद कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर मनरेगा के तहत औसत रोजगार सिर्फ 38 दिन रहा है, यानी सरकार कभी भी 100 दिन का रोजगार देने में सफल नहीं रही।

“V.B.G. RAM.G.” योजना पर भी सवाल

टीएस सिंहदेव ने भाजपा की “V.B.G. RAM.G.” योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें भगवान राम से जुड़ा कुछ भी नहीं है। इसका फुल फॉर्म है— विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)। उन्होंने आरोप लगाया कि राम के नाम का इस्तेमाल कर जनता को गुमराह किया जा रहा है।

मजदूरों के अधिकारों पर कुठाराघात

टीएस बाबा ने कहा कि मनरेगा गांधीजी के ग्राम स्वराज, विकेंद्रीकरण और काम की गरिमा का जीवंत उदाहरण थी।
लेकिन सरकार ने न सिर्फ महात्मा गांधी का नाम हटाया, बल्कि करीब 12 करोड़ मजदूरों के अधिकारों को भी कमजोर कर दिया है। उन्होंने कहा कि अब मनरेगा एक प्रशासनिक सहायता योजना बनकर रह गई है, जो पूरी तरह केंद्र सरकार की इच्छा पर निर्भर होगी।

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