
बिलासपुर। कांग्रेस संगठन में अनुशासन को लेकर सख्ती का संकेत उस वक्त साफ नजर आया, जब नव नियुक्त जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया। नियुक्ति को अभी महीनेभर भी पूरा नहीं हुआ है कि कांग्रेस का अनुशासनात्मक डंडा जिला अध्यक्ष पर चल गया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान से जुड़ा बताया जा रहा है। कोटा में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान लगाए गए बैनर और प्रचार सामग्री में प्रदेश प्रभारी और बैज की फोटो लगाए जाने को लेकर संगठन ने आपत्ति जताई है। इसी को पार्टी की तय गाइडलाइन और संगठनात्मक मर्यादा के खिलाफ माना गया है।

गौरतलब है कि इस अभियान में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री उमेश पटेल भी शामिल हुए थे। कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी के बावजूद बैनर विवाद को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने जिला अध्यक्ष से स्पष्टीकरण तलब किया है।

जारी नोटिस में महेंद्र गंगोत्री को तीन दिन के भीतर लिखित जवाब देने का अल्टीमेटम दिया गया है। नोटिस में साफ किया गया है कि तय समय-सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

नए जिला अध्यक्ष के कार्यकाल की शुरुआत में ही इस तरह की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस संगठन के भीतर भी हलचल मची हुई है। कुछ नेताओं का मानना है कि यह कदम संगठन में अनुशासन को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है, वहीं कुछ इसे राजनीतिक संदेश के तौर पर देख रहे हैं।
फिलहाल सबकी नजरें जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री के जवाब पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में उनके स्पष्टीकरण के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि कांग्रेस इस पूरे मामले में आगे क्या रुख अपनाती है।
