
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में नर्सिंग संवर्ग की लंबित मांगों को लेकर कर्मचारियों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। बिलासपुर स्थित सिम्स अस्पताल की पार्किंग में नर्सिंग कर्मचारी धरने पर बैठ गए हैं। करीब 15 वर्षों से लंबित मांगों को लेकर कर्मचारी शासन का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि मांगों पर ठोस निर्णय लेकर आदेश जारी किए जाने चाहिए। कर्मचारियों ने ऐलान किया है कि कल फिर इसी स्थान पर धरना दिया जाएगा।

नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन शुरू किया है। संघ की आठ प्रमुख मांगों में ग्रेड पे लागू करना, स्टाफ नर्स का पदनाम बदलकर नर्सिंग ऑफिसर और नर्सिंग सिस्टर का पदनाम सीनियर नर्सिंग ऑफिसर करना शामिल है। इसके अलावा नर्सिंग भत्ता बढ़ाकर 7,200 रुपये और ड्रेस भत्ता 1,800 रुपये प्रतिमाह करने की मांग की गई है।

कर्मचारियों ने लंबित पदोन्नति और समयमान वेतनमान के आदेश जारी करने, एक हजार नियमित स्टाफ नर्सों की भर्ती के लिए विज्ञापन निकालने तथा संविदा कर्मचारियों को नियमित भर्ती में प्राथमिकता देने की मांग भी उठाई है। वहीं, संविदा कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 40 हजार रुपये प्रतिमाह करने और नर्सिंग प्रशिक्षुओं का स्टाइपेंड 1,500 रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये करने की मांग की जा रही है।
नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी अमर ज्योति ने कहा कि कर्मचारियों की मांगें लंबे समय से लंबित हैं। यदि शासन जल्द निर्णय नहीं लेता है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आगामी चरण में कैंडल मार्च और स्कूटी रैली निकालने की तैयारी है। एसोसिएशन की सदस्य जागृति तिवारी ने भी कर्मचारियों की मांगों को लेकर अपनी बात रखी।
कल फिर सिम्स की पार्किंग में धरना
नर्सिंग कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। कल फिर सिम्स अस्पताल की पार्किंग में उसी स्थान पर धरना दिया जाएगा। इसके बाद कैंडल मार्च और स्कूटी रैली के जरिए शासन तक अपनी आवाज पहुंचाने की तैयारी है। अब देखना होगा कि शासन इन मांगों पर कब तक निर्णय लेता है।
