
बिलासपुर। नगर निगम के पंप हाउस में वाहनों की मरम्मत के नाम पर बड़े स्तर पर गड़बड़ी का मामला सामने आया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोप निगम के ही दैवेभो कर्मचारियों ने लगाए हैं। कर्मचारियों ने महापौर, निगम कमिश्नर से लेकर अपर कमिश्नर तक लिखित शिकायत भेजकर पूरे मामले की जांच की मांग की, जिसके बाद निगम प्रशासन ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
पुराने सामान लगाकर नए का बिल!
कर्मचारियों का आरोप है कि वाहन शाखा में पदस्थ एक सुपरवाइजर पुराने टायर और कबाड़ सामान को ही वाहनों में फिट करवा देता है, जबकि कागजों में नए पार्ट्स व टायर लगाकर मोटी रकम निकाली जा रही है। जिन गाड़ियों की असल में मरम्मत जरूरी है, उनकी फाइल ‘बजट नहीं’ बताकर रोक दी जाती है।

वाहन खड़े, काम निजी गाड़ियों से
मरम्मत न होने की वजह से कई वाहन पंप हाउस में महीनों से खड़े-खड़े खराब हो रहे हैं। मजबूरी में कामकाज के लिए निजी गाड़ियों का उपयोग किया जा रहा है और बताया जा रहा है कि इनके नाम पर भी हर महीने हजारों रुपये का खेल हो रहा है।

लाखों की मशीनें कबाड़ बन गईं
कुछ वर्ष पहले निगम ने दो वैक्यूम क्लीनिंग मशीनें खरीदी थीं। लाखों रुपये खर्च कर खरीदी गई एक मशीन तो उपयोग में आई ही नहीं और पंप हाउस में खड़ी-खड़ी कंडम हो गई। इसी तरह निगम के पास मौजूद 20 से ज्यादा वाहन कबाड़ में बदल चुके हैं—जिनमें स्वीपिंग मशीन, ट्रैक्टर, डंपर और एक्सवेटर शामिल हैं।
111 वाहनों में कई का रिकॉर्ड गायब
नगर निगम के पास कुल 111 वाहन हैं—11 फायर फाइटिंग वाहन, 10 जेसीबी, 8 ट्रैक्टर, 10 डंपर समेत अन्य गाड़ियां। कर्मचारियों के मुताबिक इनमें से कई वाहनों का रिकॉर्ड भी फाइलों से गायब है।
जांच शुरू – महापौर का बयान
महापौर पूजा विधानी ने कहा है कि, दैवेभो कर्मचारियों की शिकायत पर जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। किन-किन वाहनों में तकनीकी समस्या है और कौन सी फाइलों में गड़बड़ी हुई, इसकी पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। जरूरत पड़ने पर खराब वाहनों की मरम्मत भी कराई जाएगी।

