
गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देवभोग थाना क्षेत्र अंतर्गत उरमाल गांव में आयोजित एक मनोरंजन कार्यक्रम ने अब प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। यहां आयोजित 6 दिवसीय ओपेरा कार्यक्रम में खुलेआम अश्लीलता परोसे जाने का मामला सामने आया है। कार्यक्रम के दौरान अर्धनग्न महिलाएं मंच पर नृत्य करती रहीं, वहीं दर्शक दीर्घा में मौजूद लोग उन पर पैसे लुटाते और अशोभनीय हरकतें करते नजर आए। इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

सबसे गंभीर बात यह है कि यह आयोजन जिला प्रशासन की अनुमति और अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ। वायरल वीडियो में मैनपुर एसडीएम तुलसी दास मरकाम स्वयं मोबाइल से वीडियो बनाते दिखाई दे रहे हैं। वहीं, दो पुलिसकर्मी महिलाओं के साथ आपत्तिजनक व्यवहार करते हुए नजर आ रहे हैं।
अनुमति लेकर कराया गया था आयोजन
जानकारी के अनुसार उरमाल गांव की युवा समिति ने मनोरंजन कार्यक्रम के नाम पर 6 दिवसीय ओपेरा आयोजन की अनुमति मैनपुर एसडीएम से ली थी। इस आयोजन के लिए ओडिशा से बार डांसर बुलाए गए थे, जिन्होंने मंच पर कपड़े उतारकर अश्लील नृत्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में प्रवेश शुल्क 200 से 400 रुपये रखा गया था, जबकि बार डांसरों को प्रतिदिन करीब 60 हजार रुपये का भुगतान किया जा रहा था।
रातभर चला अश्लील डांस
8 और 9 जनवरी की रात कार्यक्रम में भारी भीड़ उमड़ी। 9 जनवरी को एसडीएम स्वयं आयोजन स्थल पर पहुंचे, जिनके लिए आयोजकों द्वारा आगे की सीट आरक्षित की गई थी। रात 11 बजे से तड़के 3 बजे तक मंच पर अश्लील नृत्य चलता रहा। पंडाल के भीतर अफसर, पुलिसकर्मी, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद थे। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कुछ लोग महिलाओं को मंच से नीचे बुलाकर उनके साथ अश्लील हरकतें कर रहे हैं।
वीडियो वायरल होने के बाद कार्रवाई
10 जनवरी को कार्यक्रम से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद पुलिस हरकत में आई। देवभोग थाना प्रभारी फैजुल शाह के अनुसार, दो पुलिसकर्मियों को तत्काल लाइन अटैच कर दिया गया है। इसके अलावा, आयोजन से जुड़े देवेंद्र राजपूत, गोविंद देवांगन, नरेंद्र साहू और हसन डाडा के खिलाफ बीएनएस की धारा 296 (3) (5) के तहत अपराध दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया, बाद में मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
SDM पर भी कार्रवाई की मांग
स्थानीय युवक द्वारा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें एसडीएम की भूमिका की जांच और कार्रवाई की मांग की गई है। बताया जा रहा है कि आयोजन की अनुमति 10 जनवरी तक थी, लेकिन विवाद बढ़ने के बाद उसी दिन कार्यक्रम को बंद करवा दिया गया।
अब यह मामला केवल अश्लीलता तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
