
दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें एक महिला ने पुरानी भिलाई थाने में पदस्थ आरक्षक अरविंद मेंढे पर छेड़छाड़ और शारीरिक संबंध बनाने के दबाव डालने का गंभीर आरोप लगाया है। मामला सामने आते ही इलाके में हड़कंप मच गया। वहीं विभिन्न हिंदू संगठनों ने थाने के बाहर जोरदार प्रदर्शन करते हुए आरोपी आरक्षक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। बढ़ते दबाव के बीच SSP विजय अग्रवाल ने आरोपी आरक्षक को निलंबित करते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

बेटे को जेल से छुड़ाने के नाम पर कथित छेड़छाड़
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसका बेटा पॉक्सो एक्ट के एक मामले में जेल में बंद है। इसी बात की जानकारी जैसे ही आरक्षक अरविंद मेंढे को मिली, उसने महिला से संपर्क किया और बेटे को जेल से बाहर निकालने का भरोसा दिलाया। महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी आरक्षक ने उसे 18 नवंबर को चरोदा बस स्टैण्ड बुलाकर उससे छेड़छाड़ की और शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया।
महिला के अनुसार, आरक्षक ने बार-बार फोन कर उसे दबाव में लेने की कोशिश की और बेटे की रिहाई का लालच देकर उसका शोषण करने की कोशिश की। इससे घबराई महिला ने तुरंत भिलाई 3 थाने में शिकायत दर्ज कराई।

हिंदूवादी संगठनों ने थाने का घेराव कर किया विरोध प्रदर्शन
जैसे ही यह मामला हिंदू संगठनों तक पहुंचा, कार्यकर्ता बड़ी संख्या में भिलाई 3 थाने पहुंच गए। उन्होंने आरोपी आरक्षक की तत्काल गिरफ्तारी, निलंबन और महिला को न्याय दिलाने की मांग करते हुए नारेबाजी की।
थाने के बाहर तनाव की स्थिति को देखते हुए ASP पद्मश्री तंवर मौके पर पहुंचीं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि आरोपी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और मामले की निष्पक्ष जांच होगी। इसके बाद भीड़ शांत हुई।

SSP ने लिया संज्ञान, आरक्षक अरविंद मेंढे सस्पेंड
पीड़िता की शिकायत और थाने में हुए हंगामे के बाद SSP विजय अग्रवाल ने तुरंत एक्शन लेते हुए आरक्षक अरविंद मेंढे को निलंबित कर दिया। उन्हें रक्षित केंद्र भेज दिया गया है।
साथ ही, मामले की जांच की जिम्मेदारी CSP भारती मरकाम को सौंपी गई है। उन्हें 7 दिनों के भीतर पूरी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। FIR दर्ज कर ली गई है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
मामला गंभीर, पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
यह पूरा प्रकरण पुलिस विभाग की छवि और विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े करता है। जिस पुलिसकर्मी पर महिलाओं की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है, वही यदि आरोपों में घिरता है तो यह जनता में अविश्वास का माहौल बनाता है।
