
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर। छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले स्थित एसईसीएल की चिरमिरी ओपन कास्ट कोयला खदान में बड़ा हादसा हो गया, जिसमें आठ मजदूर घायल हो गए। ये दुर्घटना उस समय हुई जब खदान में ब्लास्टिंग की तैयारी के दौरान डेटोनेटर में बारूद भरा जा रहा था। अचानक हुए विस्फोट ने वहां मौजूद श्रमिकों को अपनी चपेट में ले लिया। घायलों में कई महिलाएं भी शामिल हैं, जबकि दो मजदूरों की हालत नाजुक बताई जा रही है।

इलाज और राहत कार्य
हादसे के तुरंत बाद सभी घायलों को गोदरीपारा स्थित एसईसीएल रीजनल अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम इलाज में जुटी हुई है। घायलों के परिवारजन भी बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच गए हैं, जिससे वहां अफरातफरी और चिंता का माहौल बना हुआ है। अस्पताल प्रबंधन ने गंभीर घायलों की हालत पर लगातार निगरानी के लिए विशेष टीम तैनात की है।

मौके पर अधिकारी और जनप्रतिनिधि पहुंचे
घटना की जानकारी मिलते ही चिरमिरी नगर निगम के महापौर राम नरेश राय, एसईसीएल प्रबंधन के अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने घायलों से मुलाकात की और उनके उपचार की व्यवस्था का जायजा लिया। स्थानीय लोगों की भीड़ घटनास्थल और अस्पताल दोनों जगहों पर जुटी रही।

हादसा कैसे हुआ?
मिली जानकारी के अनुसार, मजदूर खदान में कोयला उत्खनन के लिए बारूद बिछा रहे थे और डेटोनेटर में विस्फोटक भरा जा रहा था। इसी दौरान अचानक विस्फोट हो गया। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि गर्म मौसम या लापरवाही इसके पीछे कारण हो सकता है। बताया जा रहा है कि ब्लास्टिंग स्थल के पास कई वाहन भी खड़े थे, जिन्हें नुकसान पहुंचा है। घटना के बाद खदान का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें ब्लास्ट के बाद की स्थिति और क्षतिग्रस्त गाड़ियों के निशान देखे जा सकते हैं।

लापरवाही के आरोप
स्थानीय मजदूरों और ग्रामीणों का आरोप है कि एसईसीएल प्रबंधन ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी की। उनका कहना है कि बारूद भरने के दौरान पर्याप्त सुरक्षा उपकरण नहीं दिए गए थे और सुरक्षा दूरी का पालन भी नहीं किया गया। कई लोगों ने इसे प्रबंधन की लापरवाही और जल्दबाजी का नतीजा बताया है।
प्रशासन और जांच की मांग
घटना चिरमिरी थाना क्षेत्र में हुई है। पुलिस और प्रशासन ने खदान प्रबंधन से रिपोर्ट मांगी है। मजदूर संगठन और स्थानीय नागरिक इस हादसे की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सके और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
इस विस्फोट ने न सिर्फ मजदूरों की जान जोखिम में डाली, बल्कि खदानों में सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
