Wednesday, February 11, 2026
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बीएलओ की गलती या सिस्टम फेल? बिलासपुर के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष विजय केसरवानी का नाम भिलाई की वोटर लिस्ट में दर्ज, कौन है जिम्मेदार? राजनीति गलियारों में चर्चा तेज, SIR प्रक्रिया पर उठे कई सवाल…

बिलासपुर। जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष विजय केशरवानी बीएलओ की गंभीर चूक का शिकार हो गए हैं। बिलासपुर के नर्मदा नगर निवासी विजय के नाम को गलती से भिलाई नगर वार्ड क्रमांक 54 की मतदाता सूची में शामिल कर दिया गया है। जिले के निर्वाचन कार्यालय से जानकारी मांगने पर यह गड़बड़ी सामने आई।

बिलासपुर निवासी, नाम पहुंचा भिलाई

विजय केशरवानी नर्मदा नगर के स्थायी निवासी हैं और नगर निगम बिलासपुर के पूर्व पार्षद भी रह चुके हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में वे बेलतरा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी रहे थे।
नामांकन फार्म सहित सभी दस्तावेजों में उनका पता नर्मदा नगर ही दर्ज है।

एसआईआर (Special Summary Revision) के दौरान भी उन्होंने अपने और परिवार के सदस्यों के दस्तावेज नर्मदा नगर के बीएलओ को ही सौंपे थे। इसके बावजूद जब उन्होंने ऑनलाइन स्टेटस चेक किया तो वे चौंक गए — उनका नाम नर्मदा नगर की लिस्ट से गायब और भिलाई नगर में दर्ज!

एसएमएस ने खोली पोल

निर्वाचन कार्यालय में जानकारी लेने पर जो एसएमएस प्राप्त हुआ, उसमें स्पष्ट लिखा था कि:

  • बीएलओ जी मोहन देवी
  • भिलाई नगर वार्ड 53/54
  • EPIK नंबर: RTN 2117612

यानी पूरी प्रक्रिया भिलाई नगर की बीएलओ द्वारा सत्यापित दिखाई जा रही है।

बड़ा सवाल – पुष्टि किस आधार पर?

यह मामला एसआईआर प्रक्रिया में लापरवाही की परतें खोल रहा है।
जब आवेदक बिलासपुर का निवासी है, दस्तावेज भी वहीं जमा किए गए हैं, तो भिलाई नगर की बीएलओ ने किस आधार पर उसकी जानकारी सत्यापित कर दी?

क्या सिस्टम में कहीं तकनीकी गड़बड़ी है या फिर मानवजनित त्रुटि?
और अगर ऐसे कई लोगों के नाम गलत स्थान पर जोड़ दिए गए होंगे, तो चुनाव के समय कितनी बड़ी दिक्कतें पैदा हो सकती हैं?

विजय केशरवानी की शिकायत

विजय केशरवानी ने बताया —

“मैं बिलासपुर का स्थायी निवासी हूँ। मेरे साथ ऐसा हो सकता है तो आम मतदाताओं की क्या स्थिति होगी? मैंने राज्य निर्वाचन आयोग को शिकायत भेज दी है और गुरुवार को कलेक्टर से भी मुलाकात करूंगा।”

उन्होंने अपने नाम को पुनः बिलासपुर की मतदाता सूची में सम्मिलित करने की मांग की है।

प्रशासन के लिए चेतावनी

यह मामला अब निर्वाचन कार्यालय के लिए बड़ा सवाल बनकर उभरा है —
क्या बीएलओ सिस्टम पर भरोसा करना ही सबसे बड़ी जोखिम साबित हो रहा है?

चुनाव की पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रखने के लिए इस चूक पर तत्काल कड़ी कार्रवाई की जरूरत है।

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