CG Big News : जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से किसानों की बेबसी और सिस्टम की अनदेखी की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। बगीचा विकासखंड के पंडरापाठ, सन्ना, नन्हेसर, डुमरकोना, छिछली और चम्पा जैसे गांवों में मिर्च की बंपर पैदावार हुई, लेकिन जब बाजार में कीमतें गिरीं तो किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया। (CG Big News)
अचानक मिर्च की कीमतों में आई भारी गिरावट से किसान इतने दुखी हो गए कि अपनी उपज को मंडी ले जाने के बजाय वे अब बोरियों में भरकर मिर्च नदी में फेंक रहे हैं। कुछ हफ्ते पहले तक यही मिर्च 20 से 25 रुपए प्रति किलो के भाव में बिक रही थी, लेकिन अब कीमतें घटकर इतनी कम हो गई हैं कि लागत भी निकलना मुश्किल हो गया है। (CG Big News)
इन गांवों में मिर्च की खेती मुख्य रूप से बड़े पैमाने पर होती है। किसान कर्ज लेकर मिर्च की खेती करते हैं, लेकिन जब लागत मूल्य तक नहीं निकलता तो उन्हें गहरा आर्थिक झटका लगता है। खाद, बीज, मजदूरी और सिंचाई जैसे खर्चों के बाद भी यदि मिर्च दो-तीन रुपए किलो बिके, तो यह नुकसान सीधे किसान की जिंदगी पर असर डालता है।
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इस साल अच्छी बारिश और अनुकूल मौसम ने उत्पादन तो बेहतर किया, लेकिन सरकार और बाजार की व्यवस्था ने किसानों को इस हालत में लाकर खड़ा कर दिया कि अब वे अपनी ही उपज को नष्ट करने को मजबूर हैं।
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किसानों का कहना है कि उन्होंने उम्मीद और भरोसे के साथ मिर्च की खेती की थी, लेकिन बाजार ने उन्हें तोड़ दिया। कोई समर्थन मूल्य नहीं, कोई सरकारी खरीदी नहीं — ऐसे में वे जाएं तो जाएं कहां?
स्थानीय प्रशासन और कृषि विभाग को इस स्थिति की गंभीरता को समझकर तत्काल राहत और स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाने की जरूरत है, ताकि किसानों की मेहनत यूं ही पानी में न बह जाए।