Chhattisgarh crime network : रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में ड्रग्स तस्करी और नशे का कारोबार अब खुलेआम हो चला है। शहर के फार्म हाउस, होटल, क्लब और यहां तक कि सेल्फ ड्राइव गाड़ियों तक नशे का यह नेटवर्क गहराई से फैल चुका है। हाल ही में एक फार्म हाउस का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें युवक ड्रग्स लेते हुए साफ नजर आ रहा है। इस वीडियो ने पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। (Chhattisgarh crime network)
फार्म हाउस में ड्रग्स पार्टी: वायरल वीडियो में युवक की पहचान चन्दन सोनकर के रूप में
भाठागांव क्षेत्र के एक निजी फार्म हाउस में शूट हुए वीडियो में युवक टेबल पर सफेद पाउडर (संभावित एमडीएमए या हेरोइन) को रोल पेपर से सूंघता दिखा। उसके आसपास शराब की बोतलें और मोबाइल जैसे कई सामान रखे हैं। आरोपी की पहचान चन्दन सोनकर के रूप में हुई है, जो रायपुर में सक्रिय ड्रग्स नेटवर्क का एक अहम हिस्सा बताया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो वह कई गैंग्स के संपर्क में है।
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होटल रूम से भी नशे के वीडियो वायरल, युवतियां और युवक शामिल
इससे पहले एक होटल में युवती के ड्रग्स लेते हुए वीडियो वायरल हुआ था। अब तीन युवकों का नया वीडियो सामने आया है, जिसमें वे खुलेआम होटल के कमरे में ड्रग्स पार्टी करते दिखते हैं। यह साफ संकेत देता है कि नशे की ये महफिलें सिर्फ फार्म हाउस तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि शहर के होटलों में भी इसका बोलबाला है। (Chhattisgarh crime network)
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सेल्फ ड्राइव कारें बनीं तस्करी का नया जरिया
नशे की तस्करी में तकनीकी सहूलियतों का भी भरपूर उपयोग हो रहा है। चन्दन सोनकर और उसके साथी सेल्फ ड्राइव कारों का इस्तेमाल कर ड्रग्स की डिलीवरी करते हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, राजधानी की आउटर सड़कों पर इन गाड़ियों के जरिये गांव के लड़कों से तस्करी कराई जा रही है।
रायपुर में ड्रग्स बेचने वाले 3 गैंग एक्टिव
तीन गैंग के आरोपी शहर में ड्रग्स बेचने का काम कर रहे हैं। एक गैंग भाठागांव, दूसरा गैंग आजाद चौक इलाका और तीसरा गैंग नेहरू नगर से ऑपरेट होता है। इन गैंग्स ने शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में सप्लाई चेन बना रखी है। गांव के युवाओं को बरगला कर इन्हें इस गैरकानूनी काम में शामिल किया जा रहा है। ग्राहक की मांग पर ड्रग्स पहुंचाने के लिए बाकायदा ट्रेनिंग भी दी जाती है।
गांव से लेकर आउटर रूट तक फैला नेटवर्क
खिलोरा, अभनपुर, सेजबहार, दतरेंगा, काठाडीह जैसे गांवों के युवकों को नेटवर्क में शामिल कर आउटर रूट से ड्रग्स की आवाजाही कराई जा रही है, जहां पुलिस गश्त कम होती है।
थाना क्षेत्रों पर उठे सवाल, पुलिस की भूमिका संदिग्ध
राजेन्द्र नगर, समता कॉलोनी, भाठागांव, नेहरू नगर, डीडी नगर, देवेंद्र नगर जैसे थाना क्षेत्रों में यह कारोबार पनप रहा है। मगर अब तक किसी बड़ी कार्रवाई की खबर नहीं आई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ पुलिसकर्मियों की मिलीभगत से ये गैंग फल-फूल रहे हैं।
जेल से बाहर आते ही फिर सक्रिय हो जाते हैं आरोपी
गैंग से जुड़े कई सदस्य पहले भी जेल जा चुके हैं, लेकिन बेल पर रिहा होते ही दोबारा उसी धंधे में लग जाते हैं। लगातार हो रहे खुलासों के बावजूद पुलिस और प्रशासन की निष्क्रियता सवालों के घेरे में है।
अब सवाल उठते हैं?…
1 ड्रग्स गैंग्स पर पुलिस कब तक चुप रहेगी?
2 वायरल वीडियो के बाद क्या कोई ठोस कार्रवाई हुई?
3 क्या सेल्फ ड्राइव कंपनियों पर निगरानी जरूरी नहीं?
4 आउटर इलाकों में पुलिस की गश्त कमजोर क्यों है?
समय रहते नहीं चेते, तो रायपुर बन सकता है नशे का अड्डा
शहर में नशे का यह फैलता दायरा युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर रहा है। अब जरूरत है ठोस कार्रवाई की – गैंग्स पर शिकंजा कसने की, नशे के सप्लाई नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने की और पुलिस व्यवस्था को जवाबदेह बनाने की। वरना रायपुर जल्द ही नशे का अगला बड़ा गढ़ बन सकता है।