
गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्कूली छात्राओं का अनोखा विरोध प्रदर्शन चर्चा का विषय बन गया है। फिंगेश्वर कन्या शाला की छात्राएं अपनी मांगों को लेकर कक्षा छोड़ सीधे सड़क पर बैठकर पढ़ाई कर रही हैं। उनका कहना है कि सरकार और प्रशासन के फैसले से उनकी पढ़ाई और भविष्य दोनों प्रभावित होंगे।

दरअसल, शासकीय कन्या शाला फिंगेश्वर को मर्ज कर ठाकुर दलगंजन हाईस्कूल (ब्वॉयज स्कूल) में शिफ्ट कर दिया गया है। इस फैसले से नाराज छात्राओं ने महासमुंद मार्ग पर सड़क पर ही किताब-कॉपी खोलकर कक्षाएं शुरू कर दीं। उनका कहना है कि वे किसी भी हालत में लड़कों के स्कूल में जाकर पढ़ाई नहीं करना चाहतीं। छात्राओं का तर्क है कि अलग कन्या शाला होने से उन्हें सुरक्षित और सहज माहौल मिलता था, लेकिन मर्ज होने के बाद लड़कों के बीच पढ़ाई करना उन्हें उचित नहीं लगता।
सुबह से ही सैकड़ों छात्राएं सड़क पर बैठ गईं और उन्होंने चक्काजाम कर दिया। इस दौरान उनकी कक्षाएं सड़क पर ही चलती रहीं। राहगीर और वाहन चालक छात्राओं को सड़क पर पढ़ाई करते देख हैरान रह गए। प्रदर्शन कर रही छात्राओं ने साफ कहा कि जब तक कन्या शाला को बहाल नहीं किया जाता, वे इसी तरह सड़क पर पढ़ाई करेंगी।

सूचना मिलते ही एसडीएम और बीआरसी मौके पर पहुंचे और उन्होंने छात्राओं को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने छात्राओं को समझाने की कोशिश की कि प्रशासनिक कारणों से स्कूलों का विलय किया गया है, लेकिन छात्राएं अपनी मांग पर अड़ी रहीं। उन्होंने दो टूक कहा कि यह उनका भविष्य और सुरक्षा का सवाल है, जिसे किसी भी हाल में नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

ग्रामीणों और अभिभावकों ने भी छात्राओं के इस आंदोलन का समर्थन किया है। उनका कहना है कि कन्या शाला की वर्षों से अलग पहचान रही है, और इसे लड़कों के स्कूल में मिलाना छात्राओं के हित में नहीं है। फिलहाल सड़क पर बैठी छात्राओं का विरोध प्रदर्शन जारी है और प्रशासन स्थिति को संभालने में जुटा हुआ है।

यह मामला अब इलाके में चर्चाओं का विषय बन गया है और लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर बिना छात्राओं की सहमति और उनकी सुविधा को ध्यान में रखे ऐसा बड़ा फैसला क्यों लिया गया। अब देखना होगा कि प्रशासन छात्राओं की मांग मानता है या फिर यह आंदोलन और लंबा खिंचता है।
