Wednesday, February 11, 2026
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वनकर्मियों पर जानलेवा हमला, तस्करों ने बंधक बनाकर बेरहमी से पीटे, मोबाइल छीने, फिर गांव ले जाकर दोबारा पीटा, लोगों की भीड़ ने फाड़ दी वर्दी…

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के करतला वन परिक्षेत्र में अवैध लकड़ी तस्करों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि उन्होंने जंगल की रक्षा में जुटे दो वनकर्मियों पर ना सिर्फ जानलेवा हमला किया, बल्कि उन्हें बंधक बनाकर गांव तक ले गए और सामूहिक रूप से पीटा। घटना से पूरे वन विभाग और पुलिस प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।

हाथियों की निगरानी के दौरान मिली तस्करी की जानकारी

पिछले कई दिनों से करतला क्षेत्र में 38 हाथियों का झुंड घूम रहा है। इनकी सुरक्षा और मूवमेंट पर नजर रखने के लिए वनपाल चमरू सिंह कंवर और बीट गार्ड गजाधर सिंह राठिया की ड्यूटी लगाई गई थी। रविवार देर रात पेट्रोलिंग के दौरान दोनों को मुड़धोवा पतरा (ग्राम जोगीपाली) के जंगल में अवैध कटाई और लकड़ी तस्करी की सूचना मिली।

ट्रैक्टर पकड़ने पर भड़के तस्कर

मौके पर पहुंचे वनकर्मियों ने संदिग्ध ट्रैक्टर को रोका, जिसमें तीन साल के लट्ठे लोड थे। ट्रैक्टर में मनाराम पटेल, अंकुश पटेल सहित 8–10 लोग मौजूद थे। लकड़ी बरामद होते ही तस्कर बौखला उठे और वनपाल व बीट गार्ड पर लाठी, डंडे और कुल्हाड़ियों से हमला कर दिया। दोनों के मोबाइल भी छीन लिए गए।

बंधक बनाकर गांव ले गए, भीड़ ने दोबारा पीटा

हमलावर यहीं नहीं रुके। घायल वनकर्मियों को जबरन वाहन में बैठाकर गांव ले जाया गया, जहां तस्करों ने ग्रामीणों को इकट्ठा कर फिर से हमला किया। 20–25 लोगों की भीड़ ने दोनों को बेरहमी से मारा और वर्दी तक फाड़ दी। भागकर बचने की कोशिश करने पर भी तस्करों ने उनका पीछा कर फिर से मारपीट की।

डीएफओ ने की शिकायत, गिरफ्तारी की मांग तेज

घटना की जानकारी मिलते ही डीएफओ प्रेमलता यादव करतला थाने पहुंचीं और आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कराया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वनकर्मियों की सुरक्षा के लिए आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी जरूरी है। विभाग ने चेतावनी दी है कि कार्रवाई नहीं होने पर उग्र आंदोलन की तैयारी की जाएगी।

वनकर्मियों में दहशत, जंगल सुरक्षा पर सवाल

लगातार बढ़ती अवैध कटाई और तस्करों के बढ़ते मनोबल से वनकर्मी भयभीत हैं। उनका कहना है कि बिना मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के न तो जंगल सुरक्षित रह पाएंगे और न ही मैदान में काम करने वाले अधिकारी-कर्मचारी।

घटना ने जंगल सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है और यह साफ दिखाता है कि अवैध तस्करों का नेटवर्क कितना आक्रामक और संगठित है।

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