Wednesday, February 11, 2026
Homeअन्य खबरेपूर्व CM भूपेश ने कही बड़ी बात: धीरेंद्र शास्त्री धर्म के नाम...

पूर्व CM भूपेश ने कही बड़ी बात: धीरेंद्र शास्त्री धर्म के नाम पर पैसा बटोरने आते हैं छत्तीसगढ़, बघेल बोले- दिव्य दरबार से इलाज होता है तो मेडिकल कॉलेज क्यों?

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर धर्म, इतिहास और आस्था को लेकर तीखी बयानबाज़ी शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयान के बाद साधु-संतों से लेकर बीजेपी नेताओं तक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। यह पूरा मामला अब सिर्फ धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि इतिहास, सनातन परंपरा और राजनीतिक विचारधाराओं की बहस में बदल गया है।

भूपेश बघेल का तीखा हमला

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर सीधे तौर पर निशाना साधते हुए कहा कि वे धार्मिक आयोजनों की आड़ में पैसा बटोरने छत्तीसगढ़ आते हैं और बीजेपी के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं। बघेल ने कहा कि वे तब से हनुमान चालीसा पढ़ रहे हैं, जब धीरेंद्र शास्त्री का जन्म भी नहीं हुआ था। ऐसे में “कल का बच्चा” उन्हें सनातन धर्म सिखाने चला है, यह स्वीकार्य नहीं है।

भूपेश बघेल ने दिव्य दरबार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर वहां लोग वास्तव में ठीक हो रहे हैं, तो फिर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल खोलने की ज़रूरत क्यों पड़ रही है। बघेल ने खुली चुनौती देते हुए कहा कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री छत्तीसगढ़ के किसी भी साधु-संत से शास्त्रार्थ कर सकते हैं।

धर्म और इतिहास पर बयान

भूपेश बघेल ने कहा कि आज़ादी की लड़ाई के समय भी हिंदू खतरे में नहीं थे। मुगलों और सुल्तानों का शासन रहा, मुसलमान सत्ता में रहे, लेकिन तब भी हिंदू समाज सुरक्षित था। उन्होंने आरोप लगाया कि धीरेंद्र शास्त्री और पंडित प्रदीप मिश्रा जैसे लोग अंधविश्वास फैला रहे हैं और समाज को गुमराह कर रहे हैं। इसके अलावा बघेल ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती कबीर साहेब और गुरु घासीदास की विचारधारा से जुड़ी हुई है। यहां की आध्यात्मिक और सामाजिक परंपरा बेहद पुरानी और मजबूत है, इसलिए किसी बाहरी व्यक्ति से धर्म या संस्कृति सीखने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि धीरेंद्र शास्त्री से उनका बेटा भी उम्र में 10 साल बड़ा है।

 

धीरेंद्र शास्त्री और बीजेपी की प्रतिक्रिया

भूपेश बघेल के बयान पर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर हिंदू समाज को जोड़ना अंधविश्वास है, तो ऐसे लोगों को देश छोड़ देना चाहिए। वहीं बीजेपी नेताओं ने भूपेश बघेल पर सनातन विरोधी होने का आरोप लगाया।बीजेपी का कहना है कि भूपेश बघेल को इतिहास की सही जानकारी नहीं है, इसलिए वे इस तरह के बयान दे रहे हैं। पार्टी नेताओं ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से तुष्टिकरण की राजनीति करती आई है और अब वही सोच इन बयानों में दिखाई दे रही है।

टीएस सिंहदेव का बयान और नई बहस

इस विवाद में छत्तीसगढ़ के पूर्व डिप्टी मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव का बयान भी चर्चा में आ गया है। भिलाई में दिए बयान में सिंहदेव ने कहा कि मुगल काल में भी हिंदू सुरक्षित थे। उन्होंने दावा किया कि इतिहास में हिंदुओं के व्यापक या सुनियोजित दमन के ठोस प्रमाण नहीं मिलते। सिंहदेव ने कहा कि वे खुद एक राजपरिवार से आते हैं और इतिहास में एमए कर चुके हैं, इसलिए गंभीर अध्ययन के आधार पर यह बात कह रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि मुगल काल में सरगुजा रियासत सुरक्षित रही और धर्म के आधार पर दमन की कोई ठोस मिसाल इतिहास में दर्ज नहीं है। सिंहदेव के मुताबिक, उस दौर में शासक संख्या में सीमित होते थे और शासन चलाने के लिए विभिन्न समुदायों के साथ आपसी संबंध बनाते थे।

धर्मांतरण और शासन व्यवस्था पर तर्क

टीएस सिंहदेव ने प्राचीन और मध्यकालीन भारत की शासन प्रणाली का हवाला देते हुए कहा कि बौद्ध धर्म के प्रसार में भी जबरन धर्मांतरण के प्रमाण नहीं मिलते। जो लोग बौद्ध बने, वे स्वेच्छा से बने। इसी तरह मुगल काल में भी बड़े पैमाने पर जबरन धर्म परिवर्तन की बात इतिहास में दर्ज नहीं है।

बीजेपी सांसद का पलटवार

टीएस सिंहदेव के बयान पर बीजेपी सांसद संतोष पांडेय ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सिंहदेव को भ्रम फैलाने वाला व्यक्ति बताया और कहा कि कोरोना काल में भी उन्होंने कोविशील्ड और कोवैक्सिन को लेकर सवाल उठाए थे। पांडेय ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके नेता तुष्टिकरण की राजनीति करते हैं और सनातन विरोधी मानसिकता रखते हैं।

सियासी तापमान चरम पर

कुल मिलाकर, भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव और धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयानों ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में धर्म और इतिहास को लेकर नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने हैं, वहीं साधु-संतों और धार्मिक आयोजनों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने के आसार हैं, क्योंकि दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों पर अड़े हुए हैं।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Posts