Wednesday, February 11, 2026
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अवैध धान तस्करी में सरकारी अफसर का नाम! ग्रामीणों ने रात में रोका ट्रक, नायब तहसीलदार पर गंभीर आरोप, 44 हजार का अवैध धान जप्त, वायरल वीडियो, ड्राइवर गिरफ्तार—पर अधिकारी की मौजूदगी पर क्यों चुप है प्रशासन?

कबीरधाम। छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के सीजन में अवैध धान के परिवहन और तस्करी को रोकने प्रशासन विशेष अभियान चला रहा है। इसके बावजूद कबीरधाम जिले से ऐसी घटना सामने आई है जिसने सभी को चौंका दिया है। यहां तहसील प्रशासन से ही जुड़े एक अधिकारी पर अवैध धान तस्करी में शामिल होने का गंभीर आरोप लगा है। ग्रामीणों ने स्वयं ट्रक को रोकते हुए धान समेत नायब तहसीलदार को पकड़कर हंगामा कर दिया। मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तर पर गरमाने लगा है।

 क्या है पूरा मामला?

यह घटना झलमला थाना क्षेत्र की है। बताया जा रहा है कि जिले के ग्राम समनापुर के पास देर रात करीब 1 बजे एक वाहन धान से भरा जा रहा था और उसे सीमावर्ती रास्तों से मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ लाया जा रहा था। ग्रामीणों को वाहन की गतिविधि संदिग्ध लगी, जिसके बाद उन्होंने ट्रक को रोका।

पूछताछ में पता चला कि धान बालाघाट जिले के छपला ग्राम (थाना बिरसा, मध्यप्रदेश) से लाया जा रहा था। लेकिन वाहन चालक के पास किसी भी तरह का वैध दस्तावेज नहीं मिला। इसी दौरान ग्रामीणों को यह देखकर और भी हैरानी हुई कि रेंगाखार तहसील में पदस्थ नायब तहसीलदार प्रेमनारायण साहू उसी वाहन के साथ मौके पर मौजूद थे।

इस दौरान तहसीलदार प्रेमनारायण साहू ने ग्रामीणों पर FIR करवाने की भी बात कही।
इस दौरान तहसीलदार प्रेमनारायण साहू ने ग्रामीणों पर FIR करवाने की भी बात कही।

 ग्रामीणों ने जताया संदेह, वीडियो वायरल

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अधिकारी खुद अवैध धान को राज्य में प्रवेश दिलाने की कोशिश कर रहे थे, जिसकी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दी गई। राजधानी जी न्यूज इसकी पुष्टि नहीं करता है। वीडियो सामने आने के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और विवाद बढ़ता गया।

सूचना मिलते ही झलमला थाना पुलिस मौके पर पहुंची और कार्रवाई करते हुए—

  • वाहन चालक को गिरफ्तार किया
  • करीब 44 हजार रुपये मूल्य का धान जब्त
  • करीब 2 लाख रुपये की वाहन भी कब्जे में

नायब तहसीलदार के खिलाफ ग्रामीणों की शिकायत के बाद मामला प्रशासनिक जांच के दायरे में आ गया है।

 प्रशासन का क्या कहना?

बोड़ला एसडीएम का कहना है कि मामला ग्रामीणों की गलतफहमी के कारण बढ़ा। उनकी ओर से दावा किया गया कि—

“अवैध धान परिवहन की रोकथाम के लिए तहसीलदार टीम मौके पर निरीक्षण करने गई थी। दो वाहनों पर कार्रवाई भी की गई है। ग्रामीणों ने परिस्थिति को गलत समझ लिया।”

हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि यदि कार्रवाई के लिए आए थे तो बिना दस्तावेज ट्रक में धान कैसे मिला और अधिकारी वहां मौजूद क्यों थे?

 अब जांच का विषय

यह मामला अब बड़े प्रशासनिक संदेह का रूप ले चुका है।

  • क्या अधिकारी वाकई तस्करी रोकने पहुंचे थे?
  • या फिर खुद ही अवैध धान परिवहन में शामिल रहे?

इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे। फिलहाल जिले भर में इस घटना को लेकर चर्चा तेज है और लोग सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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