Thursday, February 12, 2026
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CG में फिर नाचा के नाम पर नंगापन..! डांसरों पर उड़े नोट, पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले, नियमों की अनदेखी..! प्रशासन की भूमिका संदेह के घेरे में..! VIDEO वायरल…

कोरिया। छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक सांस्कृतिक आयोजनों की आड़ में बढ़ती अशोभनीय प्रस्तुतियों ने अब प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गरियाबंद और सूरजपुर के बाद अब कोरिया जिले के बैकुंठपुर से सामने आए एक वायरल वीडियो ने हड़कंप मचा दिया है।

बताया जा रहा है कि सोनहत ब्लॉक के पोड़ी क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम में कोरबा से बुलाई गई नाचा मंडली का मंचीय प्रदर्शन अचानक मर्यादा की सीमाएं लांघता नजर आया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कुछ लोग मंच पर डांस कर रही महिला कलाकारों पर नोट उड़ाते दिख रहे हैं, जबकि पृष्ठभूमि में बज रहे गीतों और दर्शकों की हरकतों ने पूरे आयोजन की गरिमा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सांस्कृतिक कार्यक्रम या खुली मनमानी?

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कार्यक्रम पारंपरिक नाचा के नाम पर आयोजित किया गया था, लेकिन धीरे-धीरे प्रस्तुति का स्वरूप बदलता गया। वीडियो में दिख रही गतिविधियों से यह भी संकेत मिलता है कि कुछ लोग मंच के पास पहुंचकर डांसरों को उकसाने की कोशिश कर रहे थे। दर्शकों की भीड़ में मौजूद कई लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम को मोबाइल कैमरों में रिकॉर्ड कर लिया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे मामले

यह कोई पहला मामला नहीं है।

  • गरियाबंद जिले में ओपेरा कार्यक्रम के दौरान अशोभनीय नृत्य का वीडियो सामने आने पर प्रशासनिक कार्रवाई हुई थी, जिसमें एसडीएम को पद से हटाया गया।
  • इसके बाद सूरजपुर में वन विभाग के रेस्ट हाउस में हुए एक विवादित डांस कार्यक्रम के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की गई थी।

अब कोरिया का ताजा मामला इस बात की ओर इशारा करता है कि पहले की घटनाओं के बावजूद जमीनी स्तर पर निगरानी व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ है।

प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि ऐसे आयोजनों की अनुमति किन शर्तों पर दी जाती है और कार्यक्रमों की निगरानी कौन करता है? यदि प्रशासनिक प्रतिनिधि या स्थानीय जिम्मेदार मौके पर मौजूद थे, तो फिर ऐसी गतिविधियां खुलेआम कैसे चलती रहीं?

सामाजिक असर को लेकर चिंता

ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि सार्वजनिक मंचों पर इस तरह की प्रस्तुतियां समाज, खासकर युवाओं और बच्चों के लिए गलत संदेश देती हैं। उनका मानना है कि यदि समय रहते सख्त दिशा-निर्देश और निगरानी लागू नहीं की गई, तो ऐसे आयोजनों की आड़ में अव्यवस्था बढ़ती जाएगी।

अब बड़ा सवाल यही है — क्या हर बार वीडियो वायरल होने के बाद ही कार्रवाई होगी, या पहले से रोकथाम के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जाएगी?

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