
बिलासपुर। बिलासपुर संभाग का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल सिम्स इन दिनों बदइंतजामी और लापरवाही की वजह से चर्चा का विषय बना हुआ है। इलाज के लिए यहां पहुंचने वाले मरीजों को समय पर न तो सुविधा मिल रही है और न ही बेहतर सेवा का भरोसा। बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत यह है कि ब्लड टेस्ट कराने के लिए घंटों लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता है। भीड़ और इंतजार से परेशान मरीज व उनके परिजन अस्पताल प्रबंधन पर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।

अस्पताल की लापरवाही का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें खून निकालने के दौरान कर्मचारी मोबाइल पर बातचीत करते नजर आ रहे हैं। यह न केवल गंभीर गैरजिम्मेदारी का परिचायक है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी गहरा सवाल खड़ा करता है। ऐसी घटनाएं मरीजों के भरोसे को हिलाने के लिए काफी हैं।
समस्या केवल जांच प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। पंजीकरण में भी अव्यवस्था हावी है। अस्पताल में लगाए गए डिस्प्ले बोर्ड महीनों से खराब पड़े हैं, जिसके कारण मरीजों को सही जानकारी नहीं मिल पाती। इस वजह से उन्हें रजिस्ट्रेशन और विभागीय काउंटर तक पहुंचने में घंटों तक भटकना पड़ता है। दूर-दराज से आने वाले मरीज और उनके परिजन इलाज से ज्यादा गंदगी, लंबा इंतजार और बदइंतजामी से परेशान हो रहे हैं।

अस्पताल की गैलरी और परिसर में स्वच्छता की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। जगह-जगह कचरा और गंदगी देखी जा सकती है। मरीजों का कहना है कि इलाज कराने से पहले उन्हें बुनियादी व्यवस्थाओं की लड़ाई लड़नी पड़ती है।

हालांकि प्रशासन दावा कर रहा है कि अस्पताल की व्यवस्था में लगातार सुधार किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत तस्वीरों और मरीजों की शिकायतों से अलग ही कहानी बयां करती है। स्वास्थ्य सेवाओं की यह हालत प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की साख पर धब्बा लगा रही है।

सवाल यह उठता है कि जब सिम्स जैसा बड़ा अस्पताल ही अव्यवस्था और लापरवाही का शिकार है, तो प्रदेश के छोटे जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। सिम्स की बदहाल स्थिति सरकार और स्वास्थ्य विभाग के लिए गहरी चिंता का विषय है, जिस पर तुरंत ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
