बिलासपुर। बिलासपुर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल पैदा कर दी है। निजी कार्यक्रम में शामिल होने आए बघेल ने छत्तीसगढ़ भवन में मीडिया से बातचीत करते हुए मंत्रिमंडल विस्तार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने साफ कहा कि साय सरकार का हालिया मंत्रिमंडल “गैर संवैधानिक” है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने संविधान की मूल भावना और कानूनी प्रावधानों की अनदेखी कर मंत्रीमंडल का गठन किया है। उन्होंने कहा – “राज्यपाल और मुख्यमंत्री को यह बताना चाहिए कि आखिर संविधान का कौन-सा संशोधन हुआ, जिसके आधार पर यह मंत्रिमंडल बनाया गया है? अगर कोई संशोधन नहीं हुआ तो 14 मंत्री बनाना सीधा-सीधा गैरकानूनी है।”
बघेल ने चेतावनी देते हुए कहा कि जब मंत्रियों का गठन ही असंवैधानिक है, तो उनके द्वारा लिए गए सभी निर्णय भी अमान्य माने जाएंगे। उन्होंने इसे प्रदेश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान के लिए बड़ा खतरा बताया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि सत्ता में बने रहने की जल्दबाज़ी और राजनीतिक फायदे के लिए सरकार संविधान के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता को यह समझना होगा कि अगर मंत्रिमंडल ही वैधानिक न रहे, तो उसकी नीतियां और फैसले भी लंबे समय तक टिक नहीं पाएंगे।
भूपेश बघेल के इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट ला दी है। जहां भाजपा सरकार अपनी नई टीम को लेकर विकास और निवेश की बड़ी योजनाओं का दावा कर रही है, वहीं कांग्रेस अब इस कदम को गैरकानूनी करार देते हुए हमलावर हो गई है। बघेल का कहना है कि यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक व्यवस्था की जड़ों से जुड़ा है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा में असली कार्यकर्ताओं की कोई अहमियत नहीं है। पार्टी के भीतर उन्हें सिर्फ दरी बिछाने और झंडा लगाने तक ही सीमित कर दिया गया है। बघेल ने आरोप लगाया कि भाजपा में बाहरी नेताओं को तरजीह दी जाती है। दूसरे दल से आने वाले नेताओं को वहां तुरंत बड़ी जिम्मेदारियां और कुर्सियां मिल जाती हैं, जबकि वर्षों से मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को नज़रअंदाज़ किया जाता है।पूर्व सीएम का यह बयान सियासी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।