Wednesday, February 11, 2026
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देखिए LIVE वीडियो: धान खरीदी टोकन न मिलने से टूटा किसान, 120 फीट ऊंचे हाई टेंशन टावर पर चढ़कर किया हंगामा, तीन घंटे तक थमी रही सांसें..!

जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था को लेकर किसानों की परेशानी अब खतरनाक मोड़ लेने लगी है। जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम कसौंदी में धान का टोकन नहीं मिलने से मानसिक रूप से परेशान एक किसान 120 फीट ऊंचे हाई टेंशन टावर पर चढ़ गया। किसान करीब तीन घंटे तक टावर पर बैठा रहा, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया और पुलिस-प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।

यह पूरा मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है। किसान का हाई टेंशन टावर पर चढ़ने का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह कभी टावर पर झूलता हुआ तो कभी नीचे उतरने की कोशिश करता नजर आ रहा है। वीडियो में किसान साफ तौर पर कहता सुनाई दे रहा है कि जब तक उसका बचा हुआ धान नहीं बिकेगा, वह नीचे नहीं उतरेगा।

धान नहीं बिकने से गहरे तनाव में था किसान

जानकारी के अनुसार ग्राम कसौंदी निवासी किसान अनिल गढ़वाल (35 वर्ष) के पास लगभग 2.77 एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें वह धान की खेती करता है। किसान अनिल ने बताया कि इस खरीफ सीजन में उसने गोद धान मंडी में एक बार में 29 क्विंटल धान बेच दिया है, लेकिन उतनी ही मात्रा में यानी करीब 29 क्विंटल धान अब भी उसके पास बचा हुआ है।

अनिल का कहना है कि वह लगातार धान बिक्री के लिए टोकन कटवाने के प्रयास करता रहा, लेकिन बार-बार आवेदन के बावजूद उसका दूसरा टोकन नहीं कटा। धान बिकने में हो रही देरी और बढ़ते कर्ज के दबाव ने उसे मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया। इसी तनाव और गुस्से में उसने यह खतरनाक कदम उठा लिया।

सुबह 9 बजे टावर पर चढ़ा, गांव में मची अफरा-तफरी

शनिवार 31 जनवरी की सुबह करीब 9 बजे किसान अनिल घर से निकला और सीधे गांव के पास लगे 120 फीट ऊंचे हाई टेंशन टावर पर चढ़ गया। कुछ ही देर में उसकी आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। देखते ही देखते वहां भारी भीड़ लग गई। ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी।

सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। साथ ही तहसीलदार राजकुमार मरावी भी प्रशासनिक टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी लगातार किसान को समझाने-बुझाने की कोशिश करते रहे, लेकिन किसान किसी भी हालत में टावर से उतरने को तैयार नहीं था।

“जब तक धान नहीं बिकेगा, नीचे नहीं उतरूंगा”

टावर के ऊपर से किसान अनिल बार-बार चेतावनी देता रहा कि जब तक सरकार उसका बचा हुआ धान नहीं खरीदेगी, वह नीचे नहीं आएगा। किसान की इस जिद और चेतावनी से पुलिस-प्रशासन की चिंता और बढ़ गई। हालात की गंभीरता को देखते हुए नगर सेना (होमगार्ड) की टीम को भी बुलाया गया।

रेस्क्यू के लिए जवान सुरक्षा जाली लेकर पहुंचे और टावर के नीचे जाली बिछाई गई, ताकि किसी भी अनहोनी की स्थिति में जान-माल का नुकसान न हो। पुलिस और प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ स्थिति को संभालने में जुटे रहे।

पत्नी की मिन्नतें भी नहीं आईं काम

किसान के टावर पर चढ़ने की खबर मिलते ही उसके परिजन भी मौके पर पहुंच गए। पत्नी ने मोबाइल फोन से अनिल से बात कर उसे नीचे उतरने के लिए काफी मिन्नतें कीं, लेकिन मानसिक तनाव में डूबा किसान किसी की बात सुनने को तैयार नहीं था। वह टावर पर इधर-उधर टहलता रहा और अपनी मांग पर अड़ा रहा।

तीन घंटे बाद प्रशासन के आश्वासन पर उतरा नीचे

करीब तीन घंटे तक चले इस हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद आखिरकार प्रशासनिक अधिकारियों ने किसान को समस्या के समाधान का भरोसा दिया। काफी समझाइश और आश्वासन के बाद किसान अनिल सुरक्षित रूप से नीचे उतरा। उसे नीचे उतारते ही पुलिस ने एहतियातन अस्पताल भेजा, जहां उसकी स्वास्थ्य जांच कराई गई।

प्रशासन का बयान

तहसीलदार राजकुमार मरावी ने बताया कि किसान का एक टोकन पहले ही कट चुका था और उस धान की बिक्री हो चुकी है। दूसरे टोकन में कुछ मात्रा का धान बचा हुआ है, इसी बात को लेकर किसान नाराज था। किसान को उसकी समस्या के समाधान का भरोसा दिया गया है और मामले को प्राथमिकता से देखा जा रहा है।

धान खरीदी नीति पर सरकार को घेरा विधायक ने

इस पूरे मामले को लेकर जांजगीर के कांग्रेस विधायक व्यास कश्यप ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की धान खरीदी नीति में कहीं भी ऐसा स्पष्ट लिखित आदेश नहीं है, फिर भी जांजगीर-चांपा जिले में किसानों के लिए खास तौर पर कठोर फैसले लिए जा रहे हैं।

विधायक ने कहा कि जिले में हजारों किसान धान खरीदी को लेकर परेशान हैं। कई किसानों के टोकन कट चुके हैं, जबकि कई किसानों के टोकन अब तक नहीं कट पाए हैं। ग्राम कसौंदी की घटना इसी व्यवस्था की विफलता का नतीजा है। किसान के पास 150 कट्टी से ज्यादा धान बचा हुआ है और उस पर करीब डेढ़ लाख रुपये का कर्ज भी है।

उन्होंने मांग की कि कलेक्टर को किसानों के हित में मौखिक नहीं, बल्कि स्पष्ट लिखित आदेश जारी करने चाहिए, ताकि भविष्य में किसानों को इस तरह की परेशानी न झेलनी पड़े। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो आगे भी ऐसे विरोध और घटनाएं सामने आती रहेंगी।

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