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जहां सुधार की जिम्मेदारी, वहीं मौत का फंदा! बिलासपुर बाल गृह में युवक की संदिग्ध मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल…

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सरकंडा थाना क्षेत्र के नूतन चौक स्थित शासकीय बाल संप्रेक्षण गृह में रायगढ़ निवासी 18 वर्षीय शुभम अघरिया की फांसी के फंदे पर लाश मिलने से हड़कंप मच गया। शुभम को एक नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में 15 अगस्त को बाल न्यायालय के आदेश पर संप्रेक्षण गृह भेजा गया था। मंगलवार सुबह उसकी मौत की सूचना सामने आई। शुरुआती जांच में पुलिस आत्महत्या की आशंका जता रही है, हालांकि पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच भी कराई जा रही है।

बताया जा रहा है कि शुभम संप्रेक्षण गृह आने के बाद से तनाव में था। घटना से एक दिन पहले उसने अपने परिजनों से फोन पर बातचीत की थी और कथित तौर पर वहां से बाहर निकालने की जिद कर रहा था। रात में खाना खाने के बाद वह सो गया था। मंगलवार सुबह बच्चों को उठाने के दौरान वह बाथरूम जाने के लिए निकला और कुछ देर बाद उसके फांसी लगाने की जानकारी सामने आई।

एक महीने में दूसरी बड़ी घटना, व्यवस्था पर सवाल

शुभम की मौत ने बाल संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि इसी परिसर में करीब एक महीने पहले भी बड़ी वारदात हो चुकी है।

13 जुलाई को नाइट चौकीदार नरेंद्र कुमार खांडे की हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि संप्रेक्षण गृह में निरुद्ध चार किशोरों ने चौकीदार को बंधक बनाया और उसकी हत्या के बाद फरार हो गए थे। बाद में पुलिस ने फरार चारों आरोपियों को पकड़ लिया था।

उस घटना के बाद संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों की संख्या, निगरानी और अंदर की व्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे। अब उसी संस्थान में एक निरुद्ध युवक की मौत ने एक बार फिर प्रशासनिक इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आखिर निगरानी व्यवस्था पर कब लगेगा सवालों का जवाब?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस बाल संप्रेक्षण गृह में निरुद्ध किशोरों की सुरक्षा, निगरानी और सुधार की जिम्मेदारी है, वहां लगातार गंभीर घटनाएं कैसे हो रही हैं? पहले चौकीदार की हत्या के बाद चार बंदियों का फरार होना और अब एक निरुद्ध युवक की फांसी से मौत—इन दोनों घटनाओं ने संस्थान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में ला खड़ा किया है।

फिलहाल सरकंडा पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों के बयान और मजिस्ट्रियल जांच के बाद ही युवक की मौत के वास्तविक कारणों और संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा व्यवस्था में किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं, इसका खुलासा हो सकेगा।

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