
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर जिले में आवारा मवेशियों को जंगल में छोड़ने को लेकर चल रहा पुराना विवाद गुरुवार रात खूनी संघर्ष में बदल गया। मस्तूरी क्षेत्र में बाइक से लौट रहे चार ग्रामीणों को रास्ते में घेरकर 6 से 8 लोगों ने लाठी-डंडों से बेरहमी से हमला कर दिया। हमले में एक ग्रामीण की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर आरोपियों की तलाश तेज कर दी है।

जानकारी के अनुसार लिमतरा निवासी जीवन मेहर अपने साथी हीरालाल यादव (50), राकेश बरगाह (28) और मुकेश पटेल (38) के साथ गुरुवार शाम करीब 5 बजे आवारा मवेशियों को दलहा पहाड़ के जंगल में छोड़ने गए थे। रात करीब 9 बजे चारों दो बाइक से वापस लौट रहे थे।

रलिया के पास घात लगाकर हमला
चारों जैसे ही रलिया गांव के पास पहुंचे, पहले से घात लगाए बैठे हमलावरों ने उनका रास्ता रोक लिया। इसके बाद लाठी-डंडों से चारों पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। अचानक हुए हमले में सभी गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजन घायलों को अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जीवन मेहर को मृत घोषित कर दिया। बाकी तीन घायलों का इलाज जारी है।

पुरानी रंजिश में वारदात की आशंका
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि एनटीपीसी सीपत के राखड़ डैम प्रभावित रलिया और आसपास के गांवों के लोगों के बीच आवारा मवेशियों को जंगल में छोड़ने को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। पुलिस को आशंका है कि इसी रंजिश के चलते हमलावरों ने ग्रामीणों को रास्ते में घेरकर वारदात को अंजाम दिया।
मस्तूरी पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। घटना के बाद इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया है।
