
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में गुरुवार को मल्हार की ऐतिहासिक बालार्जुन ताम्रपट्टिका को लेकर जमकर बहस हुई। कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने प्रश्नकाल के दौरान ताम्रपट्टिका की भाषा को लेकर सरकार से सवाल पूछते हुए विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए।

विधायक राघवेंद्र सिंह ने सदन में कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में इस ऐतिहासिक ताम्रपट्टिका को ब्राह्मी और पाली भाषा में लिखा बताया था, जबकि संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि यह पेटिकाशीर्ष ब्राह्मी लिपि और संस्कृत भाषा में लिखी गई है। उन्होंने कहा कि दोनों बयानों में विरोधाभास है और इससे भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।

राघवेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों ने गलत तथ्य प्रस्तुत कर मंत्री को गलत जानकारी दी है। उन्होंने मांग की कि यदि अधिकारियों की गलती सामने आती है तो उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए।
इस पर संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या गलती सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

ज्ञान भारतम् अभियान का भी दिया ब्यौरा
मंत्री ने बताया कि ज्ञान भारतम् अभियान के तहत छत्तीसगढ़ से मोबाइल ऐप के माध्यम से 1,24,422 पांडुलिपियों का पंजीयन किया गया। इनमें से 12,040 पांडुलिपियों का सत्यापन नई दिल्ली स्थित ज्ञान भारतम् केंद्र ने किया, जबकि 1,12,382 पांडुलिपियां तकनीकी या अन्य कारणों से अस्वीकृत कर दी गईं।
मल्हार की ताम्रपट्टिका बनी विवाद की वजह
मंत्री के अनुसार, बिलासपुर जिले के मस्तूरी क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक नगरी मल्हार से प्राप्त बालार्जुन ताम्रपट्टिका की खोज वर्ष 1987 में हुई थी। सरकारी रिकॉर्ड में इसकी पेटिकाशीर्ष ब्राह्मी लिपि और संस्कृत भाषा का उल्लेख है। वर्तमान में यह ऐतिहासिक ताम्रपट्टिका मल्हार निवासी संजीव पाण्डेय के संरक्षण में सुरक्षित है।
सरकारी रिकॉर्ड और प्रधानमंत्री के पूर्व बयान में भाषा संबंधी अंतर को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की, जिसके बाद मंत्री ने जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया।
