
रायपुर। देशभर में दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में इस पर्व का एक नजारा ऐसा भी है, जो लोगों का ध्यान खींचता है। यहां 101 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन होता है और पीछे रेलवे ट्रैक पर चलने वाली ट्रेनों की रफ्तार भी चर्चा का विषय बन जाती है। वजह है डब्ल्यूआरएस कॉलोनी का दशहरा मैदान, जो रेलवे लाइन के बेहद करीब स्थित है।

रावण दहन और रेलवे ट्रैक का अनोखा संयोग
रायपुर के डब्ल्यूआरएस कॉलोनी दशहरा मैदान में रावण, कुंभकरण और मेघनाद के विशाल पुतलों का दहन आकर्षण का केंद्र रहता है। ऊंचे पुतलों, आतिशबाजी और उत्सव के माहौल के बीच यहां का रेलवे ट्रैक इस आयोजन को दूसरे दशहरा समारोहों से अलग बनाता है। पुतला दहन के दौरान सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी होती है। ऐसे में ट्रेनों की आवाजाही को लेकर रेलवे प्रशासन की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है। जरूरत के अनुसार ट्रेनों को नियंत्रित करने या उनकी गति कम करने की व्यवस्था की जा सकती है। हालांकि, इस वर्ष ट्रेनों को रोकने या उनकी गति सीमित करने के संबंध में रेलवे प्रशासन की आधिकारिक पुष्टि अलग से जरूरी है।

ट्रेन की खिड़की से दिखता है दशहरे का नजारा
इस आयोजन का एक दिलचस्प पहलू ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों से भी जुड़ा है। यदि पुतला दहन के समय कोई ट्रेन वहां से गुजरती है, तो यात्रियों को खिड़की से विशाल पुतलों और आतिशबाजी का नजारा देखने का मौका मिल सकता है। ऐसे में ट्रेन की खिड़की किसी दर्शक दीर्घा से कम नहीं लगती कोलकाता के शिल्पकारों द्वारा तैयार किए जाने वाले विशाल पुतलों की बनावट और आसमान में चमकती आतिशबाजी इस आयोजन को भव्य रूप देती है। यही वजह है कि डब्ल्यूआरएस कॉलोनी का दशहरा रायपुर के चर्चित आयोजनों में गिना जाता है।

आस्था, उत्सव और सुरक्षा का संगम
डब्ल्यूआरएस कॉलोनी का दशहरा मैदान अपनी लोकेशन के कारण भी खास है। एक ओर हजारों लोगों की मौजूदगी में बुराई के प्रतीक रावण का दहन होता है, तो दूसरी ओर रेलवे ट्रैक पर रेल यातायात की सुरक्षा का सवाल जुड़ा रहता है।हालांकि, ट्रेनों के ठहराव और गति नियंत्रण को लेकर किसी निश्चित दावे से पहले रेलवे प्रशासन की आधिकारिक जानकारी की पुष्टि जरूरी है। इतना जरूर है कि रेलवे लाइन के पास होने वाला यह भव्य आयोजन रायपुर के दशहरे को एक अलग पहचान देता है।
