
बिलासपुर। बिलासपुर जिला अस्पताल में प्रसूता हितग्राहियों से कथित रूप से ‘खर्चापानी’ के नाम पर पैसे मांगने का मामला सामने आने के बाद अब बड़ी कार्रवाई हुई है। Rajdhanignews में खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने और वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। सिविल सर्जन की रिपोर्ट के आधार पर संभागीय संयुक्त संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं बिलासपुर ने लक्ष्मी वर्मा और संजू चौरसिया के तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई को स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

खबर का असर: विभाग ने दिखाई सख्ती
rajdhanignews द्वारा मामले को उजागर किए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। वायरल वीडियो और परिजनों के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए जांच कराई गई। रिपोर्ट सामने आने के बाद लक्ष्मी वर्मा और संजू चौरसिया दोनों नर्सों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया गया।
क्या था पूरा मामला?
जिला अस्पताल बिलासपुर में डिलीवरी के बाद मरीजों के परिजनों से कथित तौर पर ‘खर्चापानी’ के नाम पर पैसे मांगने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। वीडियो में एक महिला स्टाफ प्रसव के बाद रकम की मांग करती नजर आ आई थी। परिजनों का आरोप था कि इसे ‘रिवाज’ बताकर पैसे मांगे जाते हैं, जबकि सरकारी अस्पतालों में प्रसव सेवाएं पूरी तरह निःशुल्क होती हैं।

वीडियो में क्या सुनाई दिया?
वायरल वीडियो में महिला स्टाफ यह कहते हुए सुनाई दे रही थी, “एक में लुहू, पांच उमन ज्यादा नहीं…”, जिसे लेकर लोगों में नाराजगी देखी गई। आरोप यह भी है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर भी भुगतान का दबाव बनाया जाता था।
सरकारी दावों पर उठे सवाल
सरकार जहां निःशुल्क मातृत्व सेवाओं का दावा करती है, वहीं इस तरह के मामलों ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला सिर्फ एक अस्पताल तक सीमित है या व्यापक स्तर पर ऐसी प्रथा चल रही है—इस पर भी चर्चा तेज हो गई है।
आगे क्या?
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच प्रक्रिया जारी रहेगी और दोष सिद्ध होने पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल दो स्टाफ नर्सों के निलंबन को ‘खबर का असर’ और जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
