
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में एक ट्रांसफार्मर हटाने को लेकर शुरू हुआ विवाद देर शाम हिंसक झड़प में बदल गया। गुदरी गली विजय मार्ग स्थित लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल के सामने विरोध प्रदर्शन के दौरान रिपोर्टिंग कर रहे स्थानीय पत्रकार पर हमला कर दिया गया। घटना के बाद पत्रकारों ने कोतवाली थाना पहुंचकर धरना दे दिया। देर रात पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया, जिसके बाद धरना समाप्त हुआ।

क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के मुताबिक अस्पताल के सामने ट्रांसफार्मर लगाए जाने को लेकर स्थानीय स्तर पर विवाद चल रहा था। शिकायत के बाद नगर निगम आयुक्त ने विद्युत विभाग के कार्यपालन अभियंता को ट्रांसफार्मर हटाने के लिए पत्र लिखा था। गुरुवार को विभागीय टीम कार्रवाई के लिए पहुंची, लेकिन मौके पर जमकर हंगामा शुरू हो गया।
रिपोर्टिंग के दौरान हमला
हंगामे के बीच कवरेज कर रहे पत्रकार सुशील बखला पर कुछ युवकों ने हमला कर दिया। बीच-बचाव के दौरान पत्रकार सुमित सिंह का चश्मा टूट गया और उन्हें चोट भी आई। बताया गया कि भीड़ बढ़ने पर एक डॉक्टर और महिला डॉक्टर के साथ भी धक्का-मुक्की की कोशिश हुई।
घटना के वक्त थाना प्रभारी समेत पुलिस बल मौके पर मौजूद था। घायल पत्रकार ने आरोप लगाया कि महिला डॉक्टर को बचाने के प्रयास में उन पर हमला किया गया।
कोतवाली में पत्रकारों का धरना
घटना से आक्रोशित पत्रकार सीधे कोतवाली पहुंचे और आरोपियों पर तत्काल FIR दर्ज करने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। मामला बढ़ता देख कांग्रेस नेता भी थाने पहुंच गए और सख्त कार्रवाई की मांग की।

देर रात पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने पत्रकार की शिकायत पर अरूणेंद्र प्रताप सिंह, आकाश सिंह और बडु सिंह के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं और एससी-एसटी एक्ट के तहत FIR दर्ज की। केस दर्ज होते ही पत्रकारों ने धरना समाप्त कर दिया।
सियासी बयानबाजी तेज
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद कांग्रेस ने इसे सत्ताधारी भाजपा नेताओं की गुंडागर्दी करार दिया। पार्टी ने आरोप लगाया कि आदिवासी पत्रकार पर हमला लोकतंत्र की आवाज दबाने का प्रयास है। वहीं भाजपा की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
