
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में धर्म स्वतंत्रता विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। इस नए कानून के तहत अवैध सामूहिक धर्मांतरण कराने वालों के लिए आजीवन कारावास तक की सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कानून प्रलोभन, धोखाधड़ी, दबाव या भ्रामक जानकारी के जरिए होने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाया गया है।

विधेयक पास होते ही सत्ता पक्ष के विधायकों ने सदन में “जय श्रीराम” के नारे लगाए, वहीं विपक्ष ने इसका विरोध करते हुए वॉकआउट कर दिया। विपक्ष का कहना था कि इतने संवेदनशील मुद्दे पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए थी और इसे सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाना चाहिए था, ताकि सभी पक्षों की राय ली जा सके।

नेता प्रतिपक्ष डॉ चरण दास महंत ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि देश के कई राज्यों में ऐसे कानून पहले से लागू हैं और इस मामले में न्यायालयों में भी सुनवाई जारी है, ऐसे में जल्दबाजी में इसे पारित करना उचित नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के फैसलों से सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है।

वहीं भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस शासन में भी अन्य राज्यों में ऐसे कानून लागू किए गए थे, इसलिए अब इसका विरोध करना राजनीतिक है।
उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने विपक्ष के वॉकआउट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह विरोध नहीं बल्कि “भागना” है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को संविधान के तहत ऐसा कानून बनाने का पूरा अधिकार है और यह विधेयक पूरी तैयारी के बाद लाया गया है।
सभापति धरमलाल कौशिक ने विपक्ष की आपत्तियों को खारिज करते हुए बिल को पेश करने की अनुमति दी। सरकार के अनुसार, यह कानून 1968 के पुराने प्रावधानों को और सख्त बनाता है तथा डिजिटल माध्यम और आर्थिक प्रलोभन जैसे नए तरीकों को भी इसके दायरे में शामिल करता है।
