
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लुएंजा) को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार की चार सदस्यीय विशेषज्ञ टीम ने जिले में डेरा डाल दिया है और प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी शुरू कर दी है। केंद्रीय टीम द्वारा ग्राउंड लेवल पर सर्वे, सैंपल कलेक्शन और सैनिटाइजेशन की प्रक्रिया का बारीकी से निरीक्षण किया जा रहा है। टीम अगले दो दिनों तक अलग-अलग प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर संक्रमण की वास्तविक स्थिति का आकलन करेगी और आगे की रणनीति तय करेगी।

माइग्रेटरी पक्षियों से फैलने की आशंका
प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह संक्रमण बाहर से आने वाले प्रवासी पक्षियों के जरिए फैला हो सकता है। ये पक्षी विभिन्न जल स्रोतों और खुले क्षेत्रों में रुकते हैं, जिससे वायरस के प्रसार का खतरा बढ़ जाता है।

कोनी पोल्ट्री फार्म बना संक्रमण का केंद्र
बर्ड फ्लू का पहला मामला कोनी स्थित सरकारी पोल्ट्री फार्म में सामने आया, जहां अचानक बड़ी संख्या में मुर्गियों की मौत हुई। जांच में बर्ड फ्लू की पुष्टि होते ही प्रशासन ने फार्म को सील कर आसपास के इलाके में अलर्ट जारी कर दिया।

तीन हफ्ते तक सख्त प्रतिबंध लागू
संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में 21 दिनों तक कड़े प्रतिबंध लागू किए हैं। इस दौरान पोल्ट्री से जुड़े कामकाज पर रोक के साथ-साथ आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है।
पोल्ट्री कारोबार को बड़ा झटका
इस पूरे मामले में पोल्ट्री उद्योग को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक 8 से 9 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो चुका है, जिससे किसान और व्यापारी दोनों प्रभावित हुए हैं।
केंद्रीय टीम की फोकस कार्रवाई
- संक्रमित क्षेत्रों से नए सैंपल लिए जा रहे हैं
- सैनिटाइजेशन और बायो-सिक्योरिटी उपायों की जांच
- स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई का मूल्यांकन
- आगे के लिए रोकथाम के सुझाव तैयार
लोगों से सतर्क रहने की अपील
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों से दूर रहें, पोल्ट्री उत्पादों का उपयोग सावधानी से करें और किसी भी असामान्य स्थिति की तुरंत सूचना प्रशासन को दें।
फिलहाल, बिलासपुर में हालात नियंत्रण में रखने के प्रयास तेज हैं, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले कुछ हफ्ते बेहद अहम रहेंगे।
